यश भारत डायल 112 – पढ़े और पहचाने, कौन है ये पुलिस अधिकारी…..रात में कानून जागा, सुबह सच सुला दिया गया, ‘एक अनार, सौ बीमार’ बना ग्रामीण थाना

रात में कानून जागा, सुबह सच सुला दिया गया

जबलपुर,यशभारत। कहते हैं कि रात के अंधेरे में समझदारी भी नींद में चली जाती है, मगर यहां तो जिम्मेदारी खुद डंडा लेकर टहलने निकल पड़ी। शहर के एक कर्मठ थानेदार साहब, जो वर्तमान में स्थानांतरण होकर दूसरे थाने पहुंचे हैं रोज़ फाइलों और फरियादियों से जूझते हैं, उस रात घर जाते वक्त रात मे मजदूरों की “नशा-प्रेरित कूटनीति” सुलझाने चल पड़े। सोचा होगा—डंडा दिखेगा तो अक्ल जाग जाएगी। पर शराब के नशे में डूबी अक्ल पर डंडे का असर भी बेअसर निकला। उल्टा, शराबी मजदूर ने कानून के रखवाले को ही पत्थरों से दौड़ा दिया गया। वही पर मौजूद सोसाइटी के गार्ड साहब आए तो मामला संभला, वरना शायद “कानून व्यवस्था” खुद अस्पताल में भर्ती होती। सुबह होते ही कहानी ने यू-टर्न लिया—न एफआईआर, न चर्चा, बस गार्ड को खामोशी की सख्त हिदायत। सच ही है, कभी-कभी अपराध नहीं, उसका शोर ज्यादा खतरनाक होता है।
‘एक अनार, सौ बीमार’ बना ग्रामीण थाना

शहर में इन दिनों एक ग्रामीण थाना खासा चर्चा में है, और चर्चा होना भी लाज़िमी है। वजह कोई बड़ी आपराधिक घटना नहीं, बल्कि डीएसपी साहब की ट्रांसफर की आहट है। जैसे ही यह तय हुआ कि साहब का “ट्रायल” लगभग पूरा है और उनके जाते ही थाना खाली होने वाला है, वैसे ही दावेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालत यह है कि अभी से जुगाड़ की फाइलें खुल गई हैं, संपर्क तेज़ हो गए हैं और सिफ़ारिशों की रफ्तार पुलिस जीप से भी आगे निकल चुकी है। लाइन में खड़े तीन थाना प्रभारी ऐसे दौड़ रहे हैं मानो यह कोई पद नहीं, पुरस्कार हो। थाना इन दिनों “एक अनार, सौ बीमार” की स्थिति में पहुंच चुका है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बाज़ी कौन मारता है और कुर्सी किसकी किस्मत बनती है।








