पुलिस के लिए सिरदर्द बने लंबित अपराध, कई मामलों की जांच पूरी नहीं, कई में आरोपियों का सुराग नहीं, चोरी के कई मामलों का खुलासा नहीं, खात्मे के लिए करना पड़ रही माथापच्ची

कटनी, यशभारत। साल भर थानों में दर्ज होने वाले मामलों के खात्मे के लिए पुलिस को माथापच्ची करनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी चोरी के मामलों को लेकर हो रही है। जिले के शहरी थानों की बात करें तो चोरी की कई ऐसी वारदातें हैं, जिनके आरोपी पुलिस की पहुंच से दूर हैं। इन मामलों की जांच कैसे पूरी होगी, यह बड़ा सवाल है। माधवनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुए एटीएम लूटकांड का खुलासा भी अब तक नहीं हो पाया है। कोतवाली, एनकेजे और कुठला थाना क्षेत्र में भी कई ऐसी वारदातें हुई हैं, जिनको निपटाने में पुलिस को पसीना आ रहा है। बाइक चोरी की वारदातों का भी ग्राफ इस साल ज्यादा रहा। ऐसा कोई थाना नहीं रहा, जहां बाइक चोर सक्रिय नहीं रहे हों। हर दिन इस तरह की वारदातें घटित होती रही। इक्का-दुक्का मामलों में पुलिस को सफलता भी मिली, लेकिन ज्यादातर मामले पेंडिंग ही है। इसी तरह मर्ग की भी जांच अधूरी है। पुलिस अधिकारियों के साथ ही थाना प्रभारियों की कोशिश है कि नए साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा मामले पेंडिंग नहीं रहें लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
कोतवाली और माधवनगर में एक हजार से ज्यादा मामले
शहर के दो थानों कोतवाली और माधवनगर की बात करें तो यहां पर साल भर में एक हजार से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जबकि कुठला में यह आंकड़ा साढ़े 9 सौ के आसपास है। ग्रामीण थानों की बात करें तो सभी में 500 से 600 मामले औसतन कायम हुए हैं। शहर के ही रंगनाथ नगर थाने में यह आंकड़ा काफी कम है। जानकारी के मुताबिक साल भर मेंं यहां साढ़े तीन सौ के आसपास मामले कायम हुए हैं।
लंबित मामलों का निराकरण चुनौती
वर्ष 2025 की विदाई करीब है। दिसम्बर खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है और नए साल की दस्तक से पहले पुलिस प्रशासन पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी लंबित मामलों के निपटारे की है। इन बचे हुए दिनों के अंदर पुलिस को पुराने, अधूरे और रुके हुए प्रकरणों को बंद करने की चुनौती है, जिसे लेकर शहर और ग्रामीण अंचलों के तमाम थानों में फाइलों की हलचल तेज हो गई है।
नए मामले दर्ज करने से परहेज
थाना प्रभारी से लेकर विवेचक तक सभी की प्राथमिकता अब केवल एक ही है लंबित अपराधों का निकाल कैसे किया जाए। साल भर में दर्ज हुई शिकायतें पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई थीं, जिन्हें अब तेजी से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों द्वारा पुरानी शिकायतों की फाइलें खोलकर विवेचना की जा रही है और नए मामलों को दर्ज करने में परहेज किया जा रहा है, ताकि पेंडेंसी बढऩे न पाए।
लंबित प्रकरणों की भरमार
शहर के थानों में ऐसे प्रकरणों का ढेर लगा है, जिन्हें खत्म करने के लिए अब सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी थाना प्रभारियों को आदेश दिए हैं कि साल खत्म होने से पहले हर लंबित मामला या तो कायमी की स्थिति में पहुंचे या खात्मे की श्रेणी में दर्ज हो जाए। आदेश के बाद मातहत अधिकारी भी पूरी ताकत झोंक चुके हैं, ताकि थानों का रिकॉर्ड दुरुस्त हो सके।
फाइलें खुलीं, फरियादी भी आ रहे याद
सूत्रों के अनुसार कई ऐसी शिकायतें थीं, जो महीनों से फाइलों में धूल खा रही थीं। अब उन सभी फाइलों को तेजी से खंगाला जा रहा है। जांच पड़ताल के दौरान जिन मामलों में अपराध स्थापित होता दिख रहा है, उनमें एफआईआर दर्ज की जा रही है। जिन शिकायतों में साक्ष्य अपर्याप्त हैं, उनमें खात्मा प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिन प्रकरणों में बयान अधूरे थे, उनमें फरियादियों को फोन कॉल किए जा रहे है। कई मामलों में विस्तृत जांच फिर से शुरू कर दी गई है।







