सतना Iसतना में बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के गंभीर मामलों के बाद प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए प्रदेश के सभी शासकीय और निजी ब्लड सेंटर्स की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं।
राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में आयुक्त राठी ने साफ कहा कि रक्त की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता सीधे मरीजों, खासकर बच्चों की जान से खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में निर्देश दिए गए कि प्रदेश के सभी ब्लड सेंटर्स का ऑडिट कर 5 दिनों के भीतर रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर को भेजी जाए। साथ ही ब्लड सेंटर के लाइसेंस नवीनीकरण या नए लाइसेंस के लिए ओएनडीएलएस पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य होगा।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शासकीय ही नहीं, बल्कि निजी ब्लड सेंटर्स में भी नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की गाइडलाइंस, डीजीएचएस द्वारा जारी एसओपी और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 व नियमावली 1945 का सख्ती से पालन कराया जाए। मानकों के अनुरूप स्टाफ, उपकरण या रिकॉर्ड नहीं मिलने पर संबंधित शासकीय ब्लड सेंटर को तत्काल बंद कर निजी ब्लड सेंटर्स से एमओयू के जरिए सेवाएं ली जाएंगी।
बैठक में यह भी साफ कर दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में ब्लड रिप्लेसमेंट की अनुमति नहीं होगी। रक्त संग्रहण केवल स्वैच्छिक रक्तदान और रक्तदान शिविरों के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए एनजीओ, शैक्षणिक संस्थान, शासकीय कार्यालय, पुलिस और सैन्य इकाइयों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा।
रक्त जांच के लिए आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। नाट, एलिसा और सीएलआईए तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जबकि फोर्थ जनरेशन किट्स का इस्तेमाल केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में सीमित रूप से किया जाएगा।
आयुक्त ने थैलेसीमिया मरीजों के लिए दवाइयों, ब्लड कम्पोनेंट्स और रक्ताधान सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आपातकालीन दवाओं, जांच किट्स और मेडिकल ऑक्सीजन की वैधता की भी जांच के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि पेशेवर रक्तदाताओं से रक्त संग्रह पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे मामलों के सामने आने पर संबंधित ब्लड सेंटर के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश भर में शुरू हो रही इस सख्त कार्रवाई का मकसद एक ही है—मरीजों को सुरक्षित, शुद्ध और मानक के अनुरूप रक्त उपलब्ध कराना और भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही पर पूरी तरह लगाम लगाना।