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राज्यसभा में विवेक तंखा का सरकार पर प्रहार: “बिना प्रभाव आकलन के ‘मैकेनिकल’ तरीके से कानून बना रही है मोदी सरकार”

राज्यसभा में ‘निरसन और संशोधन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। तंखा ने आरोप लगाया कि सरकार कानून बनाते समय उनका व्यावहारिक प्रभाव (Impact Assessment) देखने के बजाय केवल यांत्रिक तरीके (Mechanical Work) से काम करने में व्यस्त है, जिससे कई बार काम आसान होने के बजाय और जटिल हो जाता है। उन्होंने अपने गृह नगर जबलपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले कोर्ट के नोटिस ‘रजिस्टर्ड पोस्ट’ से भेजे जाते थे, जिन्हें अब ‘स्पीड पोस्ट’ से भेजने का नियम बना दिया गया है। लेकिन मध्य प्रदेश में स्पीड पोस्ट के केवल दो ही हब (भोपाल और इंदौर) होने के कारण, जो काम पहले 2 दिन में हो जाता था, उसे अब पूरा होने में 6 दिन लग रहे हैं। तंखा ने तंज कसते हुए कहा कि आज के ‘फास्ट डिलीवरी’ के युग में सरकार की यह नीति सिस्टम को और धीमा कर रही है।

इसके साथ ही उन्होंने ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम’ (Disaster Management Act) में किए गए बदलावों पर भी गंभीर चिंता जताई। तंखा ने कहा कि सरकार ने कानून में ‘आपदा रोकथाम’ (Disaster Prevention) शब्द को हटाकर उसे ‘आपदा तैयारी’ (Disaster Preparation) में बदल दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि इस बदलाव से आपदा प्रबंधन विभाग का पूरा ध्यान केवल हादसे के बाद की तैयारी और राहत कार्यों पर केंद्रित हो जाएगा, जबकि सरकार को सबसे पहले आपदाओं को रोकने और उनसे बचाव की रणनीति पर काम करना चाहिए। उन्होंने सदन के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी कि बिना सोचे-समझे किए गए ये विधायी बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के बजाय बाधाएँ उत्पन्न कर रहे हैं।

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