आस्था, उजास और उल्लास का पांच दिवसीय महापर्व शुरू
आज धनतेरस : दुल्हन से सजे बाजार देर रात तक रहेंगे गुलजार

जबलपुर,यश भारत। आज 18 अक्टूबर को धनतेरस के साथ ही दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का भव्य शुभारंभ हो गया है। यह पर्व न केवल रोशनी और सजावट का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति में विश्वास, परंपरा और समृद्धि की अभिव्यक्ति भी है।शहर के हर कोने में रौनक है। लोग नए वस्त्र, आभूषण, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन खरीदने के लिए उत्साहित हैं। धनतेरस से शुरू हुआ यह उल्लास अब दीपावली, गोवर्धन पूजा, और भाई दूज तक चलेगा।
धनतेरस का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धनतेरस, जिसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है, भगवान धन्वंतरि के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन से आज ही के दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। अतः इस दिन धन, आरोग्य और समृद्धि की कामना करते हुए खरीदारी की जाती है। लोग इस दिन धातु की वस्तुएं जैसे चांदी, तांबा, पीतल या सोना, साथ ही नए बर्तन या गृह उपयोगी वस्तुएं खरीदते हैं, जिन्हें शुभता और लक्ष्मी आगमन का प्रतीक माना जाता है।
बाजारों में दिखी दीपोत्सव की झलक
धनतेरस के मौके पर जबलपुर शहर और उपनगरीय बाजार बिल्कुल दुल्हन की तरह सज गए हैं।
* गहनों की दुकानों,
* बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम,
* दोपहिया और कार शोरूम,
* फर्नीचर और सजावटी सामग्री की दुकानों में लोगों की खरीदारी चरम पर है।
पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार धनतेरस पर खास मुहूर्त में खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इसी कारण लोग सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी में जुटे रहेंगे।
कीमतों में उछाल के बावजूद परंपरा भारी

इस बार सोना-चांदी के दामों में उछाल देखा गया है, जिससे मध्यमवर्गीय ग्राहक अन्य विकल्पों की ओर भी झुके हैं।
* चांदी के सिक्कों की बजाय स्टील के बर्तन,
* सोने के आभूषणों की बजाय कोटेड ज्वेलरी या डिजाइनर धातु वस्तुएं,
* इलेक्ट्रॉनिक आइटम और घरेलू सजावटी चीजें
की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। बाजारों में रोशनी की झिलमिलाहट, रंग-बिरंगे कंदील, दीये, फूलों की माला, तोरण, और बैंडलाइट्स से माहौल पूरी तरह त्योहारमय हो गया है।
दीपावली तक यूं ही चमकते रहेंगे बाजार
धनतेरस से दीपावली तक हर दिन का अपना धार्मिक महत्व और अनुष्ठान है:
* 19 अक्टूबर – रूप चौदस (नरक चतुर्दशी): इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर विशेष उबटन और द्रव्यों से शुद्धि का विधान है।
* 20 अक्टूबर – दीपावली: मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, और कुबेर की विधिवत पूजा की जाती है।
* 21 अक्टूबर – गोवर्धन पूजा (अन्नकूट): भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाता है।
* 22 अक्टूबर – भाई दूज: भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक, जहां बहनें भाइयों को तिलक कर उनके सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।







