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देश का अभिमान : दमोह की बेटी रितिका विश्वकर्मा का बीएसएफ में चयन, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर

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दमोह। खेल जगत से एक बार फिर जिले का नाम रोशन हुआ है। दमोह की होनहार हॉकी खिलाड़ी रितिका विश्वकर्मा का चयन भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) में हुआ है। रितिका की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में, बल्कि पूरे जिले में हर्ष का माहौल है। खेल के क्षेत्र में लगातार मेहनत और लगन से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है जो आने वाली युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। रितिका विश्वकर्मा बचपन से ही खेलों, विशेषकर हॉकी में गहरी रुचि रखती थीं। प्रारंभिक शिक्षा दमोह जिले में ही प्राप्त करने के बाद उन्होंने खेल के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। मेहनत, अनुशासन और अपने खेल के प्रति समर्पण ने रितिका को जिला स्तर से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया।

उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में दमोह और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया तथा शानदार प्रदर्शन किया। बीएसएफ में चयन होने की जानकारी मिलते ही रितिका के घर पर बधाइयों का तांता लग गया। पूरे मोहल्ले में जश्न का माहौल बन गया। रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की और रितिका को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। रितिका के पिता अनिल विश्वकर्मा ने बेटी की इस सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। रितिका ने जिस लगन और मेहनत से अपने सपनों को साकार किया है, वह आज पूरे परिवार के लिए प्रेरणा है। हमें विश्वास है कि वह बीएसएफ में भी देश का नाम रोशन करेंगी। वहीं, मां मंजू विश्वकर्मा ने खुशी के आंसू के साथ बेटी को आशीर्वाद देते हुए कहा, रितिका ने न केवल हमारा बल्कि पूरे दमोह जिले का नाम ऊंचा किया है। हम हमेशा उसकी सफलता और सुरक्षा की कामना करते हैं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग, रिश्तेदार, मित्र और खेल प्रेमी रितिका के घर पहुंचे और उन्हें बधाई दी। कई स्थानीय खेल शिक्षकों ने भी इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरव का विषय बताया। दमोह के खेल जगत से जुड़े लोगों ने कहा कि रितिका जैसी बेटियां यह साबित कर रही हैं कि प्रतिभा को बस सही दिशा और अवसर मिलने की आवश्यकता होती है। रितिका का चयन न केवल उनके परिवार के लिए गौरव की बात है बल्कि दमोह जिले के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है कि छोटे शहरों से निकलने वाले खिलाड़ी भी अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं। रितिका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, प्रशिक्षकों और साथियों को दिया और कहा कि मेरा सपना था कि मैं देश की सेवा करूं, और हॉकी ने मुझे यह रास्ता दिखाया। मैं बीएसएफ के माध्यम से देश की रक्षा करने का अवसर पाकर गर्व महसूस कर रही हूं।

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