मध्यप्रदेश बना मेलियोइडोसिस का हॉटस्पॉट

मध्यप्रदेश बना मेलियोइडोसिस का हॉटस्पॉट
– लगातार सामने आ रहे मामले
भोपाल यशभारत। मध्यप्रदेश में संक्रामक बीमारी मेलियोइडोसिस को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अलर्ट जारी किया है। यह संक्रमण मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमेलाई नामक बैक्टीरिया से फैलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बरसात और नमी के मौसम में इसके संक्रमण की संभावना और बढ़ जाती है। यह बीमारी खासकर डायबिटीज, किडनी रोगियों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए जानलेवा हो सकती है।

डब्ल्यूएचओ की सूची में शामिल बीमारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मेलियोइडोसिस को उभरती हुई उपेक्षित बीमारियों की सूची में शामिल किया है। दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत में भी यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है। विशेष रूप से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा इसके नए हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहे हैं।
एम्स भोपाल की चौंकाने वाली रिपोर्ट
एम्स भोपाल द्वारा मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों से 130 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि मेलियोइडोसिस अब राज्य में स्थानिक (एंडेमिक) रूप ले चुका है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेलियोइडोसिस से पीडि़त हर 10 मरीजों में 4 की मौत हो रही है, जो इसके खतरनाक स्वरूप को दर्शाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार, फेफड़ों में संक्रमण, घाव या फोड़े जैसे होते हैं, जो समय रहते उपचार न मिलने पर गंभीर हो सकते हैं।
सावधानी ही बचाव
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बरसात के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिन लोगों को डायबिटीज या किडनी की बीमारी है या जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। स्वास्थ्यकर्मियों को भी इस बीमारी के लक्षण पहचानने और त्वरित जांच की सलाह दी गई है ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
सरकार की तैयारी
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग मेलियोइडोसिस पर नजर बनाए हुए है और जिला अस्पतालों को सतर्क किया गया है। संदेहास्पद मरीजों के सैंपल एम्स भोपाल और अन्य लैब में भेजने की प्रक्रिया तेज की गई है। विभाग का कहना है कि जागरूकता और समय पर इलाज से इस बीमारी से बचाव संभव है। एम्स भोपाल ने 2023 से अब तक चार विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए हैं, जिनमें 50 से अधिक चिकित्सक और माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रशिक्षित हुए।
ये हैं बीमारी के लक्ष्ण – खून का संक्रमण, फेफड़ों का संक्रमण, त्वचा और मुलायम ऊतक में संक्रमण, पैरोटिड ग्रंथि में गहरे फोड़े, हड्डियों और जोड़ों का संक्रमण, लंबे समय में यह टीबी जैसा दिख सकता है।






