कृष्ण भक्ति में डूबी संस्कारधानी,धूमधाम से मनाया गया नंदलाला का जन्मोत्सव
रात 12 बजते ही नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की, बधाई गीत व आतिशबाजी से पूरी संस्कारधानी गूंज उठी।

जबलपुर। योगेश्वर भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी संस्कारधानी में श्रद्धा, भक्तिभाव व हर्षोल्लास के साथ मनाई। रात 12 बजते ही नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की, बधाई गीत व आतिशबाजी से पूरी संस्कारधानी गूंज उठी।
कन्हैया की जयकारों के साथ मंदिर में झांकियां व श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं के मंचन व मटकी फोड़ ने सभी का मन मोहा। मंदिरों में कान्हा को उनकी पसंदीदा माखन मिश्री का भोग लगाया गया। बाल कलाकारों ने श्रीकृष्ण व राधा रानी बनकर मनमोहक प्रस्तुति दी। देर रात तक मंदिरों में भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा।
लघु काशी पचमठा मंदिर में लगी भक्तों की भीड़
शहर के सबसे पुराने और मशहूर पंचमठा मंदिर (जिसे लोग प्यार से ‘लघु काशी’ भी कहते हैं) में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही। हर कोई भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का हिस्सा बनने को बेताब नजर आया।
500 साल पुरानी मूर्ति आस्था का केंद्र
इस मंदिर में स्थापित भगवान की मूर्ति लगभग 500 साल पुरानी है और स्वयं धरती से प्रकट हुई थी। इसी वजह से दूर-दूर से लोग इस अद्भुत विग्रह के दर्शन करने आते हैं। वृंदावन नहीं जा पाने वाले भक्त इस मंदिर में दर्शन करने जरूर आते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर को खूबसूरती से सजाया गया। फूलों और रंगीन रोशनी से पूरा मंदिर जगमगाता रहा।
मंदिरों में नंदलाल के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा, जहां भक्तों ने एक-दूसरे को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बधाइयां दीं और मखाने और खिलौने लुटाए। मंगलवार सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु भजन-कीर्तन और नृत्य में मग्न रहे, और भगवान की आरती कर वातावरण को धर्ममय बना दिया। नंद उत्सव के अवसर पर मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। द्वारकाधीश और गोवर्धन नाथ मंदिर में विशेष सजावट के साथ बाल गोपाल के मनोरंजन के लिए खेल-खिलौने भी रखे गए हैं। भगवान श्रीकृष्ण को सुंदर झूलों में झुलाया गया, जिससे मंदिरों में जन्माष्टमी का उल्लास और भी बढ़ गया। भक्तों को प्रसाद वितरण भी किया गया। मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की खुशी और आस्था का माहौल रहा।







