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दूधमाफिया को जैसै मिल गई हो मौन स्वीकृति या फिर

दूधिये सिद्ध हो रहे ज्यादा पावरफुल

जबलपुर यश भारत। दूध माफिया के द्वारा दूध के दामों में की गई बढ़ोतरी को 12 दिन का समय बीत चुका है इस बीच रक्षाबंधन जैसा महत्वपूर्ण त्यौहार भी निकल गया लेकिन जनसंगठनों और मीडिया में सुर्खियों के बाद भी आज की तारीख तक डेयरी संचालकों की मनमानी पर कोई ठोस कार्यवाही प्रशासन की तरफ से सामने नहीं आई है जिससे प्रतीत होता है कि या तो दूध माफियाओं को प्रशासन की मौन स्वीकृति मिल गई है या फिर वह ज्यादा ताकतवर और पावरफुल हो गए हैं जिसके चलते सिर्फ कोरे आश्वासन ही सामने आ रहे हैं। इधर दूसरी तरफ आम जनता में बढे दामों को लेकर आक्रोश तो है लेकिन मजबूरी यह है कि उनके हाथ में करने को कुछ भी नहीं है हर परिवार के लिए दूध इतनी आवश्यक वस्तु है कि लोग इसे छोड़ भी नहीं सकते नवजात बच्चों से लेकर बीमार बुजुर्गों तक की आवश्यकता पर भी दूधियों की मनमानी हावी दिखाई दे रही है। इधर दूसरी तरफ यदि बात की जाए तो जनता से सीधे जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर ना तो सत्तापक्ष और न विपक्ष के जनप्रतिनिधि भी मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं जो आश्चर्य का विषय है। छोटी-छोटी बातों पर शहर को सर पर उठा लेने वाले जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर नदारत हैं। जब डेरी संचालकों ने दूध के दामों में बढ़ोतरी की थी तो लोगों को लगा था कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि आगे आकर इस समस्या का कोई ना कोई हल जरूर निकाल लेंगे लेकिन आम जनता की इस उम्मीद पर भी फिलहाल तो पानी फिरता ही नजर आ रहा है। एक तरफ शराब के दाम बढ़ने पर जब हो हल्ला मचा तो उसकी गूंज शहर से लेकर राजधानी तक में सुनाई दी यहां तक की खुद कलेक्टर ने दारू के बढ़े हुए दामों को लेकर स्टिंग ऑपरेशन तक करा डाला लेकिन दूध जैसी आवश्यक वस्तु पर कोई ठोस कार्यवाही ना होना अनेक सवालों को भी जन्म देता है।

02 16

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