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युवाओं में स्टंटबाजी का बढ़ता जुनून: भोपाल और ग्वालियर में जानलेवा करतबों का वीडियो वायरल, सख्त कार्रवाई की मांग

भोपाल/ग्वालियर, मध्य प्रदेश: प्रदेश की राजधानी भोपाल और ग्वालियर शहर से बीच सड़क पर जानलेवा स्टंटबाजी के दो चौंकाने वाले वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने एक बार फिर युवाओं में बढ़ते इस खतरनाक जुनून पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन वायरल वीडियो में न केवल ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि खुद स्टंटबाजों और सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान को भी जोखिम में डाला जा रहा है। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि युवाओं में न तो कानून का डर है और न ही मौत का भय। वे बीच सड़क पर स्टंट करने और नियमों का उल्लंघन करने को अपनी “शान” समझते हैं।

वीडियो में कैद खतरनाक करतब:

भोपाल से सामने आए वीडियो में एक बाइक सवार राजधानी की सड़कों पर खतरनाक स्टंट करता नजर आ रहा है, जो कभी बाइक पर खड़े होकर तो कभी अजीबोगरीब तरीकों से इसे चलाकर राहगीरों को चौंका रहा है। इसी तरह ग्वालियर में एक ई-रिक्शा चालक दो पहियों पर ई-रिक्शा दौड़ाते हुए दिखा, जो यातायात नियमों की सारी हदें पार करता नजर आया। इन वीडियो को देखकर स्पष्ट होता है कि ये स्टंटबाज सिर्फ ‘रील्स’ बनाने और सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने के लिए अपनी और दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।

कानून का उल्लंघन और जान का जोखिम:

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 189 के तहत सार्वजनिक सड़क पर स्टंटबाजी या बाइक रेसिंग करना एक गंभीर अपराध है, जिसमें केवल चालान ही नहीं, बल्कि जेल का प्रावधान भी है। इसके बावजूद, युवाओं में यह प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे स्टंट न केवल चालक को गंभीर चोट पहुँचा सकते हैं, बल्कि अचानक हुई दुर्घटना से सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की जान को भी खतरा हो सकता है।

शासन-प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा:

इन घटनाओं के सामने आने के बाद यह आवश्यक हो जाता है कि शासन और प्रशासन ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे। केवल चालान काटना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसे मामलों में कठोर कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए तत्काल गिरफ्तारी और जेल भेजने की कार्रवाई होनी चाहिए। समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

जन जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी:

स्टंटबाजी को रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जन जागरूकता भी बेहद महत्वपूर्ण है। अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों को युवाओं को इन खतरों के प्रति शिक्षित करना चाहिए और उन्हें सुरक्षित यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसे खतरनाक स्टंट वाले वीडियो को बढ़ावा देने से बचना चाहिए और उन्हें हटाने के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए। सड़क सुरक्षा केवल पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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