छात्रों की करुणा ने कबाड़ को बनाया बेजुबानों का आशियाना : पानी की पुरानी बोतलों से बना परिंदों के दाना-पानी का पात्र

सागर यश भारत संभागीय ब्यूरो)/ चिलचिलाती धूप, आसमान से बरसती आग और गर्म हवा के थपेड़ों के बीच जब शहर का पारा चढ़ रहा है, तब बेजुबान पक्षियों के लिए दाना-पानी जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे कठिन समय में शासकीय कला एवं वाणिज्य अग्रणी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी संवेदनशीलता से एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो न केवल जीव-दया का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा ‘मॉडल’ भी है। इन युवा हाथों ने कचरे में फेंकी गई प्लास्टिक की बोतलों को तराशकर परिंदों के लिए दाना-पानी के ‘अमृत पात्र’ तैयार किए हैं।
कबाड़ से करुणा का सफर
अक्सर हम पानी पीने के बाद प्लास्टिक की बोतलों को अनुपयोगी मानकर फेंक देते हैं, जो वर्षों तक पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं। लेकिन महाविद्यालय के जागरूक छात्र विवेक श्रीवास्तव, महक राय, श्वेत अधव, गिरराज अहिरवार, विवेक खरे, महमूद अली, नील राय और हनी ने इन बेकार बोतलों में जीवन की संभावनाएँ तलाशीं। छात्रों ने इन बोतलों को विशेष आकार में काटकर उनमें पानी और दाना भरने योग्य बनाया और उन्हें कलात्मक रूप देकर महाविद्यालय परिसर के घने और छायादार पेड़ों पर लटका दिया।
परिसर में चहकेंगे पंछी, महकेगी मानवता
भीषण गर्मी में जब जलाशय सूख रहे हैं, तब महाविद्यालय परिसर के पेड़ों पर लटके ये ‘वाटर फीडर’ पक्षियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। छात्रों की इस टोली ने न केवल इन पात्रों को लगाया है, बल्कि प्रतिदिन इनमें ताज़ा पानी और दाना भरने का संकल्प भी लिया है। विद्यार्थियों के इस प्रयास से परिसर के वातावरण में पक्षियों की चहचहाहट लौट आई है, जिसे देखकर राहगीर और अन्य छात्र भी प्रेरित हो रहे हैं।
*नवाचार के साथ सेवा का संदेश*
छात्रों के इस अभिनव कार्य की सराहना करते हुए जानकारों का कहना है कि युवा पीढ़ी का यह कदम समाज को दो महत्वपूर्ण संदेश देता है—पहला ‘जीव दया’ और दूसरा ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ (कचरा प्रबंधन)। छात्रों ने सिद्ध कर दिया है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो बिना किसी भारी भरकम बजट के भी प्रकृति और समाज की बड़ी सेवा की जा सकती है।
इन युवाओं ने शहर के अन्य नागरिकों और छात्र संगठनों से भी अपील की है कि वे अपनी छतों और बालकनी में इसी तरह के प्रयोग करें, ताकि इस भीषण गर्मी में कोई भी बेजुबान प्यास से अपनी जान न गंवाए।







