जिले की कद्दावर नेत्री पदमा शुक्ला के निधन से सभी स्तब्ध, विजयराघवगढ़ में शोक की लहर, अंतिम संस्कार कल, विरोधी भी मानते थे नेतृत्व क्षमता का लोहा, थम गया एक शिक्षिका से लोकप्रिय नेत्री तक का सफर

कटनी, यशभारत। मप्र समाज कल्याण बोर्ड की पूर्व चेयरमैन, विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र की सियासी पृष्ठभूमि से जुड़ी कटनी जिले की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री श्रीमती पदमा शुक्ला का बीती रात हरिद्वार में दुखद निधन हो गया। कैमोर समेत समूचे जिले में जिसने भी यह दुखद समाचार सुना, स्तब्ध रह गया। श्रीमती पदमा शुक्ला उन कद्दावर महिला नेताओं में से थी, जिनकी समझ, सूझबूझ और नेतृत्व क्षमता का लोहा उनके राजनैतिक विरोधी भी मानते थे। उनकी पार्थिव देह आज रात्रि 9 बजे तक हरिद्वार से कैमोर पहुंचेगी। कल कैमोर में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन के साथ ही विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र में संघर्ष की राजनीति के एक युग का अंत हो गया। जैसे ही क्षेत्र के लोगों को यह जानकारी मिलनी शुरू हुई बड़ी संख्या में लोगों के उनके लालनगर स्थित निवास पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वे पिछले एक सप्ताह से धार्मिक यात्रा पर थी। कल वे हरिद्वार पहुंची तथा यहां भी उन्होंने मंदिरों में दर्शन किए। कल रात ही उन्हें ट्रेन से कटनी वापस आना था। बताया जाता है कि जब वे हरिद्वार में होटल छोड़ रही थी तभी उन्होंने साथ में मौजूद एक सहायिका को सीने में कुछ दर्द होने की जानकारी दी। साइलेंट अटैक के चलते कोई कुछ समझ पाता और इलाज के लिए उन्हें कहीं ले जाया जाता इसके पहले ही उन्होंने होटल में ही अंतिम सांस ली। पदमा जी के साथ उनके पति शैलेन्द्र शुक्ला भी थे। यह खबर जैसे ही आज सुबह कैमोर पहुंची लोग अवाक रह गए। सहसा किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि विजयराघवगढ़ की कद्दावर नेत्री अब दुनियां को अलविदा कह चुकी हैं। जिंदगी की घड़ियां तय हैं। शायद उनकी धार्मिक यात्रा का प्रयोजन बनवाकर संसार छोड़ने से पहले प्रभु ने उन्हें अपने दर्शनों का सौभाग्य दे दिया। वे बद्रीनाथ, केदारनाथ की यात्रा पूरी करते हुए हरिद्वार पहुंची थी।
3 विधानसभा चुनाव लड़े, चार बार जिला पंचायत सदस्य रही
कटनी जिले की राजनीति में पदमा शुक्ला का बड़ा कद रहा। वे लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी रही, बाद में कांग्रेस में शामिल हुई। उन्होंने 2 बार भाजपा की टिकट पर तथा एक बार कांग्रेस की टिकट पर विजयराघवगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ा। वे चार बार जिला पंचायत की सदस्य भी निर्वाचित हुई। भाजपा की प्रदेश सरकार ने उनके कद और प्रभाव को देखते हुए उन्हें समाज कल्याण बोर्ड का चेयरमैन बनाकर केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया था। उनकी मिलनसारिता, सहजता,
लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता की वजह से भोपाल और दिल्ली के नेता भी उनका आदर करते थे। क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी खासी पकड़ थी। जानकारी के मुताबिक मूलतः वे करेली की रहने वाली थी तथा एक शिक्षिका के रूप में कैमोर आकर यहीं बस गई। श्रमधाम शिक्षण संस्थान में उन्होंने अपनी सेवाएं दी। एक शिक्षिका से लोकप्रिय नेत्री तक का सफर आज थम गया। यशभारत परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।







