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खरीद शुरू होने के पहले ही गोदाम परिसर में आने लगी धान- इसी मामले को लेकर पिछले साल हुई थी बड़ी कार्रवाई

आधा दर्जन से अधिक अधिकारी हुए थे, सस्पेंड 36 वेयर हाउस आज भी ब्लैकलिस्टेड

 

जबलपुर यश भारत। धान उपार्जन को लेकर अभी उपार्जन केंद्रों का निर्धारण ही शुरू हुआ है और गड़बड़ियां सामने आने लगी है। वृताकार सेवा सहकारी संस्था खंड का जो उपार्जन केंद्र निशिका वेयरहाउस खबरा मझौली तहसील में खुलना निर्धारित किया गया है वहां पर उपार्जन शुरू होने के पहले ही धान के ढेर लगने लगे हैं। जबकि इसी मामले में पिछले साल प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई करते हुए बिना उपार्जन शुरू हुए धान डंप करवाने के मामले में 36 वेयर हाउस को ब्लैकलिस्टेड किया गया था साथ ही साथ इस पूरे मामले में सात अधिकारी भी सस्पेंड हुए थे।

यह पूरा मामला

2 दिन पहले जिला प्रशासन द्वारा धान खरीदी के लिए 86 उपार्जन केंद्रों का निर्धारण किया गया था जिसमें 74वें नंबर पर निशिका वेयरहाउस का था जहां वृताकार सेवा सहकारी संस्था खंड का द्वितीय उपार्जन केंद्र खोला गया था। जैसे ही उपार्जन केंद्र खोलने की जानकारी वेयरहाउस संचालक को लगी उसके बाद वहां पर धान के ढेर लगने शुरू हो गए। जबकि नियम स्पष्ट है कि उपार्जन प्रारंभ होने के पहले कोई भी व्यक्ति उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज लेकर नहीं आएगा । जब जिस किसान का स्टाल होगा वह उस समय अपनी उपज लेकर आ सकता है। लेकिन इस पूरे मामले में तो लिस्ट में नाम आते ही धान के ढेर दिखाई देने लगे है।

नहीं ली कोई भी सीख

पिछले साल इसी तरह का मामला सामने आया था जिसमें गोदाम संचालकों द्वारा गोदाम परिसर में और गोदाम के अंदर धान का भंडारण कर लिया गया था। जिसके बाद भोपाल से एक दर्जन अधिकारियों की टीम जांच करने आई थी। जिसके बाद एमपी वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के रीजनल मैनेजर सहित चार ब्रांच मैनेजर फूड कंट्रोलर और विपणन संघ के जिला प्रबंधक को सस्पेंड कर दिया गया था । वही 36 वेयर हाउस हो को ब्लैक लिस्ट किया गया था, जो कि आज भी खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा बड़े स्तर पर भोपाल और जबलपुर में बैठे प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले हुए थे। उसके बाद भी इस तरह की कारगुजारी यदि सामने आती है तो फिर यह पूरे के पूरे प्रशासनिक तंत्र को ठेंगा दिखाना होगा।

मिलावट का है खेल

यह पूरा तंत्र जबलपुर में लंबे समय से कम कर रहा था लेकिन पिछले साल हुई बड़ी सर्जरी के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कुछ सुधार होगा लेकिन जो मामला सामने आया है वह तो कुछ और ही बयां कर रहा है इस पूरे मामले में एडवांस्ड फीडिंग और मिलावट का खेल खेला जाता है। जिसमें व्यापारी और कुछ गोदाम संचालक मिलकर धर्म कांटे से तोल कर धान अपने परिसर में डंप करवा लेते हैं और किसानों को सादे कागज पर उसकी रिसीविंग दे देते हैं और जब खरीद शुरू होती है तो उतने मात्रा की धान उनके खातों में चढ़ा दी जाती है और जो धान उन से ली जाती है उसमें मिलावट करके वजन बढ़ाया जाता है और मोटी कमाई होती है।

वर्जन

उपार्जन के पूर्व गोदाम परिसर में धान नहीं लाई जा सकती। यह पूरी तरह से नियम विरुद्ध है और यदि ऐसा पाया जाता है तो फिर कड़ी कार्रवाई की जाएगी पिछले साल भी इस मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी ।

दीपक सक्सेना
कलेक्टर जबलपुर

हमारे कार्यालय के द्वारा पूर्व में पत्र जारी किया गया है। जिसमें बताया गया है कि उपार्जन पूर्व किसी भी गोदाम में धान नहीं लाई जा सकती चाहे वह गोदाम परिसर हो या गोदाम के अंदर हो किसी भी प्रकार का खाद्यान्न नहीं रखा जा सकता।

कैलाश चौहान
ब्रांच मैनेजर सिहोरा

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