4 साल बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच को मिली बड़ी सफलता, डकैती और अप्राकृतिक यौनाचार का खूंखार अपराधी पुणे से गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने महाराष्ट्र के पुणे से चार साल से फरार एक खूंखार अपराधी को धर दबोचा, 2019 में कोर्ट ने सुनाई थी 6 साल की सजा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने चार साल से फरार चल रहे एक खूंखार अपराधी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यह सफलता उन्हें महाराष्ट्र के पुणे शहर में मिली। पकड़ा गया अपराधी वही है जिसे वर्ष 2019 में दिल्ली की एक अदालत ने डकैती और अप्राकृतिक यौनाचार जैसे गंभीर अपराधों में 6 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान उसे 90 दिन की इमरजेंसी पैरोल मिली थी, जिसके बाद से वह लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था।
डीसीपी अपूर्वा गुप्ता ने दी गिरफ्तारी की जानकारी: डीसीपी अपूर्वा गुप्ता ने इस गिरफ्तारी के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम मोहम्मद अली उर्फ सुजा (उम्र 32 वर्ष) है, जो मूल रूप से बिहार के खगड़िया जिले का निवासी है और दिल्ली में पहले मेट्रो परियोजना में मजदूरी का काम करता था। एआरएससी यूनिट की एक विशेष टीम ने चार राज्यों में लगातार उसकी तलाश की, जिसके परिणामस्वरूप आखिरकार उसे पुणे के नवलाख उम्ब्रे इलाके की एक बड़ी फैक्ट्री से गिरफ्तार किया गया। उस फैक्ट्री में लगभग 5000 लोग काम करते हैं, जिसके कारण उसे पहचानना और पकड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
आरोपी पर अप्राकृतिक यौनाचार का गंभीर आरोप: डीसीपी गुप्ता ने बताया कि यह मामला 30 नवंबर 2015 का है, जब एक युवक गाजियाबाद से लोकल ट्रेन से आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर उतरा था। रास्ते में तीन लड़कों ने उसे रोका, उसका मोबाइल फोन लूट लिया और जब उसने विरोध किया, तो एक आरोपी ने उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और फिर उसे बुरी तरह पीटने के बाद फरार हो गए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने दो आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था, जबकि तीसरा आरोपी, मोहम्मद अली, बाद में गिरफ्तार हुआ था।
टेक्निकल और ह्यूमन इंटेलिजेंस से मिली सफलता: इस वारदात के बाद, आरोपी का नाम दो अन्य मामलों में भी सामने आया, जिनमें पीएस आनंद विहार और पीएस मधु विहार में दर्ज लूट के मामले शामिल थे। अदालत से सजा मिलने के बाद वह जेल में था, लेकिन अक्टूबर 2021 में उसे 90 दिन की पैरोल मिली थी। पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद वह वापस जेल नहीं लौटा और बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र में लगातार अपना नाम और पहचान बदलकर भागता रहा। वह अक्सर अपने रहने की जगह, सिम कार्ड और हुलिया बदलता रहता था, जिससे पुलिस को उसे पकड़ने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। आखिरकार, क्राइम ब्रांच की टेक्निकल टीम और ह्यूमन इंटेलिजेंस के संयुक्त प्रयासों से पुलिस उस तक पहुंचने में सफल रही और उसे दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।







