एम्स भोपाल में शुरू होने जा रहा द विंची रोबोट 4.0 का हाईटेक युग; 30 करोड़ की मशीन से जटिल सर्जरी होगी आसान

एम्स भोपाल में शुरू होने जा रहा द विंची रोबोट 4.0 का हाईटेक युग; 30 करोड़ की मशीन से जटिल सर्जरी होगी आसान
भोपाल, यशभारत। राजधानी के एम्स भोपाल में चिकित्सा जगत का एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। गंभीर बीमारियों के इलाज को और अधिक सटीक और सुगम बनाने के लिए संस्थान ने लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक द विंची रोबोट 4.0 प्रणाली का ऑर्डर जारी कर दिया है। यह हाईटेक मशीन अगले एक महीने के भीतर भोपाल पहुंच जाएगी, जिसके बाद इंस्टॉलेशन और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस अत्याधुनिक तकनीक के आने से मध्य प्रदेश के मरीजों को अब बड़े महानगरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
एम्स प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, इस रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत पहले चरण में यूरोलॉजी विभाग से की जाएगी। इसके तहत प्रोस्टेट कैंसर, किडनी ट्यूमर और मूत्राशय के कैंसर जैसी जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों के ऑपरेशन इस अत्याधुनिक प्रणाली से किए जाएंगे। आने वाले समय में इस सुविधा का विस्तार कार्डियक, गैस्ट्रो, जनरल सर्जरी और स्त्री रोग विभागों में भी किए जाने की योजना है, जिससे हर वर्ग के मरीजों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
द विंची रोबोटिक सिस्टम में चार रोबोटिक आर्म और एक मुख्य कंसोल होता है। शल्य चिकित्सक कंसोल पर बैठकर 3डी हाई-डिफिनिशन कैमरे के जरिए मिलने वाले स्पष्ट दृश्यों की मदद से रोबोटिक आर्म को नियंत्रित करते हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि डॉक्टर शरीर के अत्यधिक संवेदनशील और बारीक हिस्सों में भी बेहद सटीकता के साथ सर्जरी कर पाते हैं।
पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इस आधुनिक पद्धति में बहुत छोटे चीरे लगाने की आवश्यकता होती है। इससे मरीजों को ऑपरेशन के दौरान कम दर्द होता है, रक्तस्राव न के बराबर होता है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी काफी कम हो जाती है।
अब तक मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी के लिए दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था। निजी अस्पतालों में इस उच्चस्तरीय इलाज का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर होता है। ऐसे में सरकारी संस्थान में यह सुविधा शुरू होने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। हालांकि, इलाज का वास्तविक खर्च बीमारी की स्थिति, आवश्यक जांच और अस्पताल में ठहरने के दिनों पर निर्भर करेगा।
सर्जनों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
इस रोबोटिक प्रणाली के सफल और सुचारू संचालन के लिए एम्स प्रशासन ने पहले चरण में 20 सर्जनों को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। मशीन के इंस्टॉलेशन के तुरंत बाद यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में गहन प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये डॉक्टर रोबोटिक तकनीक के जरिए जटिल शल्य क्रियाओं को अंजाम देंगे, जिससे प्रदेश और आसपास के राज्यों के मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा का पूरा लाभ मिल सकेगा।







