18 दिवसीय प्रदर्शन के बाद मिला सरकार से मौखिक आश्वासन धरना समाप्त, मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर आंदोलन की चेतावनी
Sit-in called off after 18-day protest following verbal assurance from the government; warning issued of renewed agitation if demands are not met.

18 दिवसीय प्रदर्शन के बाद मिला सरकार से मौखिक आश्वासन धरना समाप्त, मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर आंदोलन की चेतावनी
भोपाल, यश भारत। पेसा मोबिलाइजर्स की सेवा बहाली और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में भारतीय मजदूर संघ के तत्वावधान में चल रहा 18 दिवसीय प्रदर्शन गुरुवार को सरकार के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। आंदोलनरत पेसा मोबिलाइजर्स ने कहा कि यदि सरकार ने अपने आश्वासन पर जल्द अमल नहीं किया तो वे दोबारा धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे। आंदोलन के दौरान पेसा मोबिलाइजर्स के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। मुलाकात के बाद सरकार की ओर से मौखिक रूप से आश्वासन दिया गया कि पेसा मोबिलाइजर्स के संबंध में जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। सरकार की ओर से प्रदर्शन समाप्त करने का आग्रह भी किया गया जिसके बाद आंदोलनकारियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर अपने अपने घरों की ओर रवाना होने का निर्णय लिया। इससे पहले सोमवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अंबेडकर पार्क पहुंचकर आंदोलनरत पेसा मोबिलाइजर्स से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ खड़े हैं और उनके न्याय एवं अधिकार के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी। सिंघार ने कहा कि प्रदेश के करीब 5200 पेसा मोबिलाइजर्स को एक झटके में बेरोजगार कर दिया गया है। यह केवल हजारों युवाओं के रोजगार का मामला नहीं, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका भविष्य और सम्मान से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि पेसा मोबिलाइजर्स कई दिनों से राजधानी में धरने पर बैठे हैं लेकिन आदिवासियों और उनके अधिकारों की बात करने वाली सरकार के पास उनकी समस्याएं सुनने तक का समय नहीं है।
उन्होंने कहा कि पेसा मोबिलाइजर्स सरकार और आदिवासी ग्राम सभाओं के बीच महत्वपूर्ण जमीनी कड़ी के रूप में काम करते रहे हैं। उन्होंने गांव गांव जाकर ग्राम सभाओं को सक्रिय करने और पेसा कानून के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनकी सेवाएं समाप्त किए जाने से पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्राम सभाओं की सक्रियता पर असर पड़ सकता है।
सिंघार ने कहा कि पेसा कानून केवल भाषणों और पोस्टरों से जमीन पर लागू नहीं हो सकता। इसके लिए गांवों में लगातार काम करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। पेसा मोबिलाइजर्स ने वर्षों तक कम मानदेय पर गांव गांव जाकर सेवाएं दीं लेकिन अब सरकार उनके अनुभव और मेहनत को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार छिनने से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है और कांग्रेस इस मुद्दे पर मजबूती से आवाज उठाएगी। आंदोलन समाप्त करते हुए पेसा मोबिलाइजर्स ने स्पष्ट किया कि सरकार ने उन्हें जो आश्वासन दिया है उस पर वे भरोसा कर रहे हैं। यदि तय समय में उनकी सेवा बहाली और वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे पुन: राजधानी में आंदोलन शुरू करेंगे ।







