जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

यश भारत खास : शासन द्वारा बरमान को पवित्र नगरी घोषित करने के सालों बाद भी नहीं हो सके सार्थक प्रयास :  प्राचीन मंदिरों का नही हो पा रहा उचित संरक्षण

नरसिंहपुर यशभारत। भगवान ब्रह्मा की तपस्थली और पुण्य सलिला मां नर्मदा के पावन तट अनेकों ऐतिहासिक धार्मिक महत्व के स्थलों को संजोए हुए हैं। लेकिन इनके उचित रखरखाव और इन स्थलों को विकसित करने में शासन-प्रशासन ने अभी तक कोई भी उचित रूचि नहीं ली है।

बरमान में मराठा कालीन गरूण स्तंभ सहित कई प्राचीन मंदिरों का बेहतर संरक्षण नहीं हो रहा है। प्रदेश शासन भी यहां पवित्र नगरी घोषित करने के 11 वर्षो के बाद भी कोई सार्थक कार्य नहीं करा सका है। जिससे यह क्षेत्र पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो सके। जिले के प्रमुख तीर्थ क्षेत्र बरमान में नर्मदा के दोनों तटों पर कई ऐतिहासिक स्थल हैं। यहां घाट से लेकर मंदिरों प्रतिमाओं का अपना अलग महत्व और गौरव है। लेकिन इन स्थलों को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचाने दिलाने कोई सार्थक प्रयास नहीं किए जा रहे हैं । स्थलों के संरक्षण के नाम पर पुरात्व विभाग ने केवल बोर्ड लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है।

भगवान विष्णु को समर्पित है स्तंभ
ब्रम्हांड घाट बरमान में पुरातन धार्मिक गतिविधियों के कई साक्ष्य हैं। यहां स्थित गरुण स्तंभ पर सुदर्शन चक्र की उपस्थिति इसे भगवान विष्णु को समर्पित बताती है। काले और हरे रंग के प्रस्तर निर्मित चौकोर स्तंभ में भगवान विष्णु के दशावतारों का अंकन है। यह स्तंभ 17 वीं,18 वीं शताब्दी का है जब मराठा साम्राज्य अपने चरम पर था।

सभी प्राचीन स्थल भी दर्शनीय

यहां लंबा-चौड़ा सीढ़ी घाट उसके ऊपरी स्थान पर बना हाथी दरवाजा आसपास बने कई मंदिर काफी प्राचीन हैं। नर्मदा की दो धाराओं जिसे बारही संगम कहा जाता है। उसके पास टापू पर बना दीपेश्वर मंदिर भी दर्शनीय स्थल है। वहीं नर्मदा के उस पर बराह प्रतिमा व उसके पास बना मंदिर जिसे रानी दुर्गावति का मंदिर कहा जाता है। मान्यता यह भी है कि इस मंदिर के निर्माण की कथा गढ़ा मंडला की रानी दुर्गावती से जुड़ी है लेकिन मंदिर के एक शिलालेख पर संवत 1867 अंकित है। जिससे इस मंदिर का रानी दुर्गावती से कोई संबंध होने पर संदेह किया जाता है। वहीं सतधारा में पांडव कुंड सहित अन्य मंदिर भी प्राचीन हैं। नर्मदा तट के इन्हीं प्रमुख क्षेत्रो व स्थलों को समाहित करते हुए पवित्र नगरी क्षेत्र घोषित किया गया था लेकिन यहां पवित्रता और पर्यटन विकास के मान से कोई कार्य नहीं हुए हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर स्थित सूर्य कुंड में प्रत्येक पांच रविवार को स्नान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है तथा आस्था बान श्रद्धालुओं की मनोकामना भी पूरी हो जाती है। इसलिए प्रत्येक रविवार यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने के लिए पहुंचा करतें हैं। पुण्य सलिला मां नर्मदा के दक्षिण तट पर शारदा मंदिर परिसर में प्राचीन शिव मंदिर है जहां पर काफी लंबे समय से अखंड ज्योति जल रही है। तथा संस्कृत विद्यालय में ब्राह्मण बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है। अभिषेक पूजन का क्रम भी जारी रहता है।

 

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