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मृत पड़े अमृत सरोवर तालाब, मझौली के हटौली में 18 लाख खर्च जिसमें 8 इंच पानी नहीं, जिले में 99 अमृत सरोवर तालाब के नाम पर करोड़ों खर्च

जबलपुर यशभारत। जिले में जल संरक्षण योजना को लेकर जिला पंचायत से जो 2022-23 की सूची यश भारत के हाथ लगी है उसमें 99 अमृत सरोवर तालाब में शासन के करोड़ों रुपए खर्च हुए। किंतु इन अमृत सरोवर तालाबों में किस तरह से संबंधितों ने पलीता लगाया जिसकी एक बानगी जबलपुर जिला पंचायत के अंतर्गत मझौली जनपद पंचायत के हटौली ग्राम पंचायत के अंतर्गत तालाब में देखने मिली। इस अमृत सरोवर तालाब में जिस तरह से गुणवत्ता भी काम किया गया उसने तो पूरे सिस्टम की पोल खोल कर रख दी। बता दें कि इस ग्राम पंचायत में अमृत सरोवर तालाब के लिए 18 लाख रुपए खर्च हुए जिसमें 8 इंच भी पानी नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि सरकार की अपनी ही मशीनरी इन योजनाओं और अभियानों को कैसे बट्टा लगाती है इसे समझना आसान है। सिस्टम की भर्राशाही और योजनाओं के नाम पर होने वाली करोड़ों की फंड़िंग अफसर और संबंधित कर्मचारियों की साठगांठ कर डकार जाते हैं ये भी किसी से छिपा ही नहीं है।
*सबसे ज्यादा मझौली जनपद में हुई राशि खर्च*
जिले में 99 अमृत सरोवर तालाब बनाए गए जिसमें केवल मझौली जनपद के अंतर्गत सबसे अधिक 28 अमृत सरोवर तालाब जिस तरह से बनाए गए उसने तो यहां के सभी तालाबों की पोल खोल कर रख दी। इस जनपद के अंतर्गत अन्य तालाबों में भी किस तरह से कार्य किया होगा जिसकी जानकारी देने के लिए भी अधिकारियों के पास जवाब नहीं है।
उल्लेखनीय है कि हर बार सरकार जलसंरक्षण के लिए योजनाएं लाती है। गर्मी का सीजन शुरू होते ही तामझाम के साथ प्रदेश भर में नए नए अभियान चलाए जाते हैं। इन दिनों प्रदेश सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान चला रही है। अभियान का उद्देश्य लोगों को पानी सहेजने के लिए जागरुक करने के साथ ही तालाब, बाबड़ी और बर्बाद हो रहे कुओं का संरक्षण भी है।सरकार के इस अभियान ने बीते दो साल में जल संवर्धन के नाम पर करोड़ों की लागत से बने जल सरोवरों की सुध ली तो उनकी हालत खस्ता नजर आई। ज्यादातर जगहों पर बनाए गए अमृत सरोवर सिर्फ दिखावा ही साबित हुए हैं। जिसमें जिले से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर हटौली ग्राम पंचायत के अंतर्गत 18 लाख की लागत से बना अमृत सरोवर भ्रष्टाचार की कहानी सुना रहा है। जिले में 99 अमृत सरोवरों पर दो साल में करोड़ों से ज्यादा फूंक दिए गए लेकिन मौके पर तालाब नहीं केवल खंतियां ही नजर आ रही हैं।
*योजना की फजीहत*
अमृत सरोवर योजना के तहत जिले में 99 अमृत सरोवर बनाए गए थे। लेकिन उनकी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।सरकार जल गंगा संवर्धन अभियान से लोगों को जल संरक्षण का संदेश दे रही है तब अमृत सरोवरों की बदहाली और करोड़ों की हेराफेरी की चर्चा जोरों पर है। जानकारी के मुताबिक बिछी एवं कोनी ग्राम पंचायत में भी अमृतसरोवर तालाब के नाम पर बड़े पैमाने पर हेरा फेरी की गई है।
*दिया तले ही घनघोर अंधेरा*
तालाबों के नाम पर अफसरों ने कैसे सरकारी योजना को बर्बाद किया है इसके लिए जब यशभारत ने हटौली ग्राम पंचायत के तालाब की मौके पर जाकर पड़ताल की तो अमृत सरोवर के नाम पर जो तालाब खोदा गया है उसे खंती कहना ज्यादा बेहतर है। इस अमृत सरोवर के कुछ हिस्से में
खुदाई हुई है जबकि बाकी का हिस्सा सपाट मैदान नजर आ रहा है।
*खुद प्यासे रह गए अमृत सरोवर तालाब*
भीषण गर्मी में जहां जानवरों एवं पंछियों को सुखे कंठों को तर करने के लिए पानी की तलाश रहती है ऐसी स्थिति में वह उसे अमृत सरोवर तक बड़ी आस से प्यास बुझाने के लिए पहुंचने तो है किंतु जब वह तालाब को पानी विहीन देखते हैं तो अन्यत्र पानी की तलाश में घूमते रहते हैं।
जिले भर में अमृत सरोवर तालाब के नाम पर बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार से निगरानी-सत्यापन पर सवाल
में सवाल उठाए जा रहे हैं।
*मझौली जनपद में यहां बने अमृत सरोवर*
.बीछी .नंदग्राम
खाड.उमरधा.दर्शनी.खबरा
धोरा.दर्शनी.नेगाई .हरदुआ कला
खलरी.खुडावाल (नवीन).खुडावल.नंदग्राम खटौलीपड़रिया.धनगवां.पौंडा.रौंरौसरा.महगवा-चनगवा.खतौली.उमरिया (ढिरहा)
सिमरिया आदि तालाबों के लिए शासन के करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। यदि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इन अमृत सरोवर तालाबों जांच की जाए तो परिणाम चौंकाने वाले होंगे की किस तरह से शासन की राशि की होली खेली गई है।

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