पुरैनी तालाब का अस्तित्व खतरे में,, अतिक्रमण की गिरफ्त में तालाब
कभी पूरा गांव करता था निस्तार

कटनी- नगरीय सीमा क्षेत्र के बाल गंगाधर तिलक वार्ड पुरैनी में स्थित अतिप्राचीन तालाब पहले जल प्रबंधन की उत्कृष्ट मिसाल माना जाता था,जिसका अस्तित्व अब समाप्ति की ओर है।
तालाब की ऐसी दुर्दशा देख स्थानीय नागरिक कहते है आधुनिकता के दौर में हमारे बुजुर्गों की धरोहर समाप्त हो रही है क्योंकि भूमफिया ने चारों तरफ से तालाब में अतिक्रमण कर अवैध निर्माण कर लिया है। औऱ लगभग दो से ढाई एकड़ का ये तालाब अब लगातार अवैध निर्माण की चपेट में सिकुड़ता जा रहा है।स्थानीय प्रशासन भी इसके जीर्णोद्धार के लिए आगे नही आता।
अस्तित्व गंभीर संकट में
यह ऐतिहासिक जलस्त्रोत पूरी तरह से जलकुंभी चोई की मोटी परत से ढंक चुका है। इस हरे शैवाल ने तालाब के विशाल जल क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया है। जिससे इसका पानी उपयोग के लायक नहीं रह गया है। कभी पुरैनी की सुंदरता और जल आपूर्ति का केंद्र रहा यह तालाब अब एक बदबूदार और दलदली क्षेत्र में तब्दील हो रहा है।यहाँ तालाब का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसके निकट ही ट्रांसपोर्ट नगर भी विकसित हो रहा हैं।
साथ ही तालाब के आसपास हनुमानजी का प्राचीन मंदिर होने के साथ अन्य धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि तालाब की वर्तमान स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां आने वाले लोगों के लिए इसका पानी किसी भी उपयोग में नहीं लाया जा सकता है, जिससे उनकी धार्मिक और दैनिक जरूरतों पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों और नगर प्रशासन द्वारा इस तालाब की स्थिति सुधारने के लिए कई बार सफाई अभियान चलाए गए हैं, लेकिन यह प्रयास अल्पकालिक साबित होते हैं। कुछ ही दिनों के बाद तालाब की स्थिति फिर से जस की तस स्थिति में हो जाता है।
सफाई पर खर्च होने वाला सरकारी पैसा और श्रम, समस्या के मूल कारण जलकुंभी के बेकाबू फैलाव को रोकने में असफल रहा है। उचित रखरखाव और देखरेख के अभाव में ऐसे ही समाप्त होते रहे भीषण गर्मी के दौर मै आवारा जानवरों के लिए गंभीर पेयजल संकट भी खड़ा हो सकता है।
जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन इस विरासत को बचाने के लिए एक दीर्घकालिक और टिकाऊ कार्ययोजना बनाए, अन्यथा जल्द ही यह तालाब इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
क्या कहते है नागरिक
तालाब के चारो ओर भूमाफियाओं ने अवैध रूप से बिल्डिंग तान ली है। स्थानीय पार्षद भी निष्क्रिय है। यही कारण है तालाब की स्थिति बत्तर होती जा रही है पानी तो उपयोग लायक नहीं है। नगर प्रशासन को इसके जीर्णोद्धार के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए।
ओमप्रकाश बर्मन
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बारिश के दिनों में जल्द भर जाने वाला तालाब जहाँ गर्मियों में भी भरपूर पानी रहता था। तालाब में लगे कमल इसकी शोभा बढ़ाते थे और पूरा गांव यहाँ निस्तार करता था अब भीषण गंदगी औऱ अवैध अतिक्रमण की चपेट में है।
सुमन बाई कोल
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तालाब को साफ-सुथरा बनाये जाने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए। तालाब के चारो भी कॉरिडोर औऱ पेड़ पौधे लगा कर इसका संरक्षण किया जाना चाहिए ताकि गर्मियों के दिनों में इसका उपयोग नागरिको के अलावा आवारा जानवर अपनी प्यास बुझा सके।
रंजीत साहू
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