पतंग निकालने के चक्कर में गई मासूम की जान, डेढ़ साल बाद गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज

जबलपुर। कभी-कभी मासूम खेल जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाते हैं। ऐसा ही एक मार्मिक मामला अधारताल थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां वर्ष 2023 में पतंग निकालने के प्रयास में चलाया गया एक पत्थर 7 वर्षीय मासूम सिद्धार्थ बर्मन को जा लगा था। सिर पर गहरी चोट के बाद बच्चे की हालत गंभीर हो गई थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। करीब डेढ़ साल बाद पुलिस ने घटना की मर्ग जांच पूर्ण कर पत्थर चलाने वाले नाबालिग लड़के के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया है।
क्या था मामला?
घटना 17 दिसंबर 2023 की शाम करीब 4 बजे की है। सीओडी कॉलोनी, महाराजपुर निवासी 7 वर्षीय सिद्धार्थ बर्मन अपने दोस्तों सूर्या, संभव, अंशु, नंदू, ढोलू और यश के साथ तिनआमा टावर के पास खेल रहा था। उसी दौरान एक पतंग बिजली के तारों में फंस गई थी, जिसे निकालने के लिए लड़कों ने पत्थर मारने शुरू कर दिए।इसी बीच, संभव नामक लड़का जब पतंग निकालने के लिए जोर से पत्थर मार रहा था, तभी एक पत्थर जाकर सीधे सिद्धार्थ के सिर पर लग गया। उस समय सिद्धार्थ वहीं नीचे अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। पत्थर की तीव्र चोट लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया।
इलाज के दौरान हुई मौत
घटना के बाद परिजन तुरंत उसे गंभीर हालत में जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। कई दिनों तक इलाज चला लेकिन बच्चा होश में नहीं आया। अंततः 7 जनवरी 2024 को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि सिर पर लगी गहरी चोट के कारण ही उसकी मृत्यु हुई।
परिजनों की व्यथा, डेढ़ साल की प्रतीक्षा
मासूम की मौत के बाद परिजन न्याय की आस में लगातार पुलिस से गुहार लगाते रहे। लंबे समय तक चली मर्ग जांच के बाद पुलिस ने सभी तथ्यों व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर 24 जुलाई 2025 को संभव नामक आरोपी लड़के के खिलाफ धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस का बयान
अधारताल थाना प्रभारी के अनुसार, “घटना की मर्ग जांच पूरी कर ली गई थी। पीएम रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शी बच्चों के बयान और घटनाक्रम की पुष्टि के आधार पर आरोपी के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।”
सामाजिक चेतावनी
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। बिजली के तारों में फंसी पतंगों को निकालने की लापरवाही और खुले में खतरनाक खेल आज बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। अभिभावकों और समाज को मिलकर बच्चों को ऐसी असावधान गतिविधियों से दूर रखने की जरूरत है।
न्याय की राह पर पहला कदम
परिजनों का कहना है कि भले ही अब जाकर मामला दर्ज हुआ हो, लेकिन इससे उन्हें अपने बेटे के लिए इंसाफ की एक शुरुआत की उम्मीद जगी है। सिद्धार्थ की मां की आंखें नम थीं, लेकिन वे बोलीं, “मेरा बच्चा तो चला गया, पर अब किसी और की मां की गोद न सूने।”







