नियमों का ‘ऑटोमैटिक’ टॉर्चर: व्यावसायिक वाहनों के नहीं बन रहे फिटनेस सर्टिफिकेट , ATS सुविधा न होने से हो रहा हजारों का खर्च

मंडला ।जिले में पिछले छह महीनों से व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का काम बंद है। केंद्र सरकार के नए नियमों और जिले में ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) की अनुपलब्धता के कारण हजारों ऑटो, बस और ट्रक संचालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नए प्रावधानों के अनुसार, व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच अब केवल एटीएस के माध्यम से ही की जा सकती है।
मंडला जिले में अभी तक एटीएस की स्थापना नहीं हुई है, जिसके चलते वाहन मालिकों को फिटनेस और परमिट संबंधी कार्यों के लिए जबलपुर जाना पड़ रहा है। इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ऑटो संचालकों का कहना है कि जबलपुर जाकर फिटनेस कराने में उन्हें 1500 से 2000 रुपए तक का केवल ईंधन खर्च आता है। इसके अलावा, दो दिन की रोजी-रोटी भी प्रभावित होती है। उनकी शिकायत है कि एक ओर फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस दस्तावेजों की जांच कर चालानी कार्रवाई कर रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बस और ट्रक मालिकों के लिए भी जबलपुर की यात्रा बहुत खर्चीली साबित हो रही है। फिटनेस प्रमाणपत्र न होने से उनके वाहनों के परमिट और बीमा पर भी असर पड़ रहा है, जिसके कारण उन्हें हजारों रुपए खर्च करके फिटनेस बनवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस संबंध में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) विमलेश गुप्ता ने बताया कि यह निर्णय शासन स्तर का है। शासन के निर्देशानुसार, अब फिटनेस जांच केवल एटीएस के माध्यम से ही की जा सकती है और स्थानीय स्तर पर उनके पास फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। वहीं, यातायात पुलिस का कहना है कि जब तक शासन के नियम प्रभावी हैं, तब तक दस्तावेजों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। मंडला जिले के हजारों व्यावसायिक वाहन संचालक उम्मीद कर रहे हैं कि शासन जल्द ही जिले में एटीएस की स्थापना करेगा या कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराएगा। वे शिविर आयोजित कर स्थानीय स्तर पर फिटनेस प्रमाणपत्र बनाने का कार्य फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं।






