खास खबर : तीन चुनावों से सामान्य मेयर, तो क्या इस बार ओबीसी आरक्षण ? राजनीतिक दल चौकन्ने, नगर निगम चुनाव की तैयारियां शुरू
राज्य सरकार ने महापौर के आरक्षण के लिए नियुक्त किया अधिकारी, जल्द होगी प्रक्रिया

कटनी ( आशीष सोनी)। प्रदेश में अगले साल यानि 2027 में नगरीय निकाय चुनाव कराए जाने है, इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य सरकार ने महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन आयुक्त को अधिकृत अधिकारी नियुक्त कर दिया है। इस जानकारी के साथ कटनी में भी राजनीतिक दल चौकन्ने हो गए है। 2022 में हुए चुनाव में कटनी नगर निगम के महापौर का पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ था। संभावना है कि इस बार आरक्षण बदल जायेगा। चक्रानुक्रम पर गौर करें तो इस बार कटनी नगर निगम के महापौर का आरक्षण पिछड़ा वर्ग के लिए होने के पूरे आसार है। इसी समीकरण के आधार पर कांग्रेस और भाजपा में जमावट शुरू हो चुकी है।
सूत्र बताते है कि सरकार ने प्रदेश स्तर पर मेयर के आरक्षण के लिए अधिकारी तो नियुक्त कर ही दिया है, आरक्षण की तारीख भी कुछ समय के बाद आ जाएगी। नगरीय निकाय चुनाव के लिए अब साल भर से भी कम समय बचा है, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस ने कटनी नगर निगम के 45 वार्डों के लिए जमीनी जमावट शुरू कर दी है। भाजपा वार्डों में बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को एक्टिव कर रही है तो कांग्रेस भी वार्ड कमेटियों के गठन के जरिए कार्यकर्ताओं की टीम तैयार कर रही है। कांग्रेस में इस बार पार्षद प्रत्याशी जिला स्तर पर फाइनल होंगे, इस लिहाज से कांग्रेस ने वार्डों में जनाधार वाले नेताओं को अभी से चिन्हित करना शुरू कर दिया है। इस बार भी दोनों दलों के लिए महापौर का पद खास रणनीति का हिस्सा है। आरक्षण की हर संभावना को ध्यान में रखकर ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाया जा रहा है जो उस वर्ग से संबंधित हो।
पिछड़ा वर्ग के चांस ज्यादा
आरक्षण के चक्रानुक्रम के जानकारों का मानना है कि इस बार कटनी नगर निगम के महापौर का पद पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित होने की संभावना सबसे ज्यादा है। पिछले आरक्षण पर गौर करें तो 2022 में सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ जिसमें भाजपा और कांग्रेस को पराजित कर निर्दलीय उम्मीदवार प्रीति सूरी मेयर चुनी गई। इसके पहले के चुनाव में महापौर का पद सामान्य वर्ग के लिए ही आरक्षित था, जिसमें भाजपा के शशांक श्रीवास्तव मेयर चुने गए थे। शशांक के पहले भी कटनी का महापौर पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ, जिसमें कांग्रेस की टिकट पर श्रीमती निर्मला पाठक महापौर चुनी गई। यह आरक्षण 2009 में हुआ था। इस तरह देखा जाए तो लगातार तीन चुनाव से कटनी मेयर का पद सामान्य वर्ग ( महिला या अनारक्षित) के लिए ही रहा। तीन चुनावों के इस आरक्षण में 17 साल गुजर चुके हैं, लेकिन पिछड़े वर्ग को मौका नहीं मिला है। इस लिहाज से आरक्षण के जानकार मान रहे हैं कि आगामी चुनाव में कटनी नगर निगम में ओबीसी आरक्षण होने की संभावना सबसे ज्यादा है। सूत्र बताते है कि दोनों ही प्रमुख दलों को इस बात का अंदेशा है, इसीलिए अभी से ओबीसी नेताओं को तैयार किया जा रहा है।
विभाग ने जारी किया आदेश
नगरीय विकास एवं आवास विभाग विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पदों का आरक्षण मध्यप्रदेश नगरपालिका (महापौर एवं अध्यक्ष पद आरक्षण) नियम, 1999 के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने 12 जून को आदेश जारी कर दिए हैं। उधर, राज्य निर्वाचन आयोग भी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए नगरीय निकायों की मतदाता सूची तैयार कराने की प्रक्रिया में जुट गया है। माना जा रहा है कि सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों स्तरों पर चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था
मौजूदा नियमों के अनुसार नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए कुल पदों का 50 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाता है। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आरक्षण का निर्धारण रोटेशन प्रणाली के आधार पर किया जाता है, ताकि पिछली बार आरक्षित रही सीटों के स्थान पर अन्य निकायों को अवसर मिल सके। नगर निगमों में महापौर पदों के आरक्षण का फैसला लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, जिसमें यह तय होता है कि कौन-सा नगर निगम किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा।
2022 में हुई थी महापौर पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया
मध्यप्रदेश में नगर निगम और नगरपालिका चुनाव वर्ष 2014 में आयोजित हुए थे। इसके बाद 2019 में चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों और बाद में कोविड-19 महामारी के कारण चुनाव समय पर नहीं हो सके। वर्ष 2022 में भी ओबीसी आरक्षण को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा, जिसके चलते चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद राज्य में नगर निगम और नगरपालिका चुनाव संपन्न कराए गए। इसी दौरान महापौर पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया मई 2022 में पूरी की गई थी।







