कटनी ग्रेड सेपरेटर को सीआरएस की हरी झंडी का इंतजार, देश के सबसे लंबे रेल फ्लाई ओव्हर ब्रिज में अप लाइन का काम पूरा
कटनी, यशभारत। देश के सबसे लंबे रेल फ्लाई ओवर कटनी ग्रेड सेपरेटर में अप ग्रेड लाइन का काम पूरा हो गया है। अप ग्रेड से मालगाडिय़ों के परिचालन के लिए अब केवल सीआरएस यानि मुख्य संरक्षा आयुक्त की हरी झंडी का इंतजार है, लेकिन सीआसरएस कटनी कब आंएगे, इसको लेकर अभी भी संशय बरकरार है। बीना-बिलासपुर रेलखंड के झलवारा से मझगवां के बीच तैयार हुए अप ग्रेड सेपरेटर का चीफ सेफ्टी कमिश्नर को 28-29 जुलाई को निरीक्षण करना था लेकिन ऐन वक्त पर उनका कटनी दौरा कार्यक्रम टल गया। अब नई तारीख का इंतजार किया जा रहा है। रेल सूत्रों की मानें तो रेल संरक्षा आयुक्त अगले हफ्ते कभी भी कटनी आकर ग्रेड सेपरेटर का निरीक्षण कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक ग्रेड सेपरेटर का काम इरकॉन कंपनी द्वारा किया जा रहा है। करीब चार-पांच माह पहले इस ट्रैक पर 60 किलोमीटर की स्पीड से गाड़ी दौड़ाकर ट्रायल किया गया था। यहां रेलवे की योजना करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से मालगाड़ी दौड़ाने की है। गौरतलब है कि ग्रेड सेपरेटर परियोजना से बीना-कटनी रेल खंड में जहां मालगाडिय़ों की संख्या बढ़ेगी, तो वहीं इनकी गति में वृद्धि होगी। परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किलोमीटर है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी और अप ग्रेड सेपरेटर 15.85 किमी शामिल हैं। अप साइड 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स व डाउन साइड 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण कराया गया है। विदित हो कि अप्रैल महीने में रेलवे ने ग्रेड सेपरेटर के अप ट्रेक में कार्य पूरा होने के बाद कटंगी खुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक रेलगाड़ी का सफल परिचालन किया था।
जानकारी के अनुसार ग्रेड सेपरेटर में डाउन ट्रेक पर लंबाई 17.52 किलोमीटर है। अप ट्रेक की तरह डाउन में कार्य अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सका है। बताया जा रहा है कि डाउन ट्रेक पर काम पूरा होने में करीब 8 माह का समय लग सकता है, हालांकि रेल अफसरों का कहना है कि सीआरएस की अनुमति पर अप ट्रेक से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा और इसके बाद डाउन ट्रेक में भी तेजी से कार्य होगा। फिलहाल डाउन ट्रेक में बनाए गए पिलर्स पर स्पॉन रखने का कार्य किया जा रहा है। बारिश के मौसम के चलते कार्य प्रभावित हो रहा है और करीब चार माह तक कार्य बंद होने की आशंका है।
दो महीने पहले बनकर तैयार अप ट्रैक
जानकारी के मुताबिक न्यू कटनी जंक्शन में बन रहे अप ट्रैक का निर्माण कार्य करीब दो महीने पहले ही पूरा हो गया है, लेकिन यहां से ट्रेनों के आवागमन से पहले सीआरएस मुख्य सुरक्षा आयुक्त की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। ट्रेनों के संचालन में सीआरएस के दौरे का मुहूर्त लगातार बिगड़ता जा रहा है। पहले जहां 30 जुलाई को कटनी पहुंची सीआरएस ने ऐनवक्त पर ग्रेड सेपरेटर का निरीक्षण कैसिंल कर दिया तो वहीं सोमवार और मंगलवार को प्रस्तावित सीआरएस का दौरा भी अचानक निरस्त हो गया।
नॉन इंटरलॉकिंग काम भी पूरा
जानकारी के अनुसार दो माह पूर्व रेलवे ने एकनेजे में नॉन इंटरलॉकिंग कार्य कराया गया है, जिसमें ग्रेड सेपरेटर को झलवाराए सिंगरौली और मुड़वारा स्टेशन से जोड़ा गया है। इस कार्य में ग्रेड सेपरेटर की लाइन को सिग्नल और प्वाइंट के माध्यम से इंटरलॉक करके जोड़ा गया है, जिससे ग्रेड सेपरटर का अप ट्रेक कटनी-बीना रेलखंड से जुड़ गया है। कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ रुपए है। यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनने जा रहा है, जो न केवल संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि रेलवे संचालन में भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। कटनी, यशभारत। देश के सबसे लंबे रेल फ्लाई ओवर कटनी ग्रेड सेपरेटर में अप ग्रेड लाइन का काम पूरा हो गया है। अप ग्रेड से मालगाडिय़ों के परिचालन के लिए अब केवल सीआरएस यानि मुख्य संरक्षा आयुक्त की हरी झंडी का इंतजार है, लेकिन सीआसरएस कटनी कब आंएगे, इसको लेकर अभी भी संशय बरकरार है। बीना-बिलासपुर रेलखंड के झलवारा से मझगवां के बीच तैयार हुए अप ग्रेड सेपरेटर का चीफ सेफ्टी कमिश्नर को 28-29 जुलाई को निरीक्षण करना था लेकिन ऐन वक्त पर उनका कटनी दौरा कार्यक्रम टल गया। अब नई तारीख का इंतजार किया जा रहा है। रेल सूत्रों की मानें तो रेल संरक्षा आयुक्त अगले हफ्ते कभी भी कटनी आकर ग्रेड सेपरेटर का निरीक्षण कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक ग्रेड सेपरेटर का काम इरकॉन कंपनी द्वारा किया जा रहा है। करीब चार-पांच माह पहले इस ट्रैक पर 60 किलोमीटर की स्पीड से गाड़ी दौड़ाकर ट्रायल किया गया था। यहां रेलवे की योजना करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से मालगाड़ी दौड़ाने की है। गौरतलब है कि ग्रेड सेपरेटर परियोजना से बीना-कटनी रेल खंड में जहां मालगाडिय़ों की संख्या बढ़ेगी, तो वहीं इनकी गति में वृद्धि होगी। परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किलोमीटर है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी और अप ग्रेड सेपरेटर 15.85 किमी शामिल हैं। अप साइड 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स व डाउन साइड 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण कराया गया है। विदित हो कि अप्रैल महीने में रेलवे ने ग्रेड सेपरेटर के अप ट्रेक में कार्य पूरा होने के बाद कटंगी खुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक रेलगाड़ी का सफल परिचालन किया था।
जानकारी के अनुसार ग्रेड सेपरेटर में डाउन ट्रेक पर लंबाई 17.52 किलोमीटर है। अप ट्रेक की तरह डाउन में कार्य अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सका है। बताया जा रहा है कि डाउन ट्रेक पर काम पूरा होने में करीब 8 माह का समय लग सकता है, हालांकि रेल अफसरों का कहना है कि सीआरएस की अनुमति पर अप ट्रेक से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा और इसके बाद डाउन ट्रेक में भी तेजी से कार्य होगा। फिलहाल डाउन ट्रेक में बनाए गए पिलर्स पर स्पॉन रखने का कार्य किया जा रहा है। बारिश के मौसम के चलते कार्य प्रभावित हो रहा है और करीब चार माह तक कार्य बंद होने की आशंका है।
दो महीने पहले बनकर तैयार अप ट्रैक
जानकारी के मुताबिक न्यू कटनी जंक्शन में बन रहे अप ट्रैक का निर्माण कार्य करीब दो महीने पहले ही पूरा हो गया है, लेकिन यहां से ट्रेनों के आवागमन से पहले सीआरएस मुख्य सुरक्षा आयुक्त की हरी झंडी मिलने का इंतजार है। ट्रेनों के संचालन में सीआरएस के दौरे का मुहूर्त लगातार बिगड़ता जा रहा है। पहले जहां 30 जुलाई को कटनी पहुंची सीआरएस ने ऐनवक्त पर ग्रेड सेपरेटर का निरीक्षण कैसिंल कर दिया तो वहीं सोमवार और मंगलवार को प्रस्तावित सीआरएस का दौरा भी अचानक निरस्त हो गया।
नॉन इंटरलॉकिंग काम भी पूरा
जानकारी के अनुसार दो माह पूर्व रेलवे ने एकनेजे में नॉन इंटरलॉकिंग कार्य कराया गया है, जिसमें ग्रेड सेपरेटर को झलवाराए सिंगरौली और मुड़वारा स्टेशन से जोड़ा गया है। इस कार्य में ग्रेड सेपरेटर की लाइन को सिग्नल और प्वाइंट के माध्यम से इंटरलॉक करके जोड़ा गया है, जिससे ग्रेड सेपरटर का अप ट्रेक कटनी-बीना रेलखंड से जुड़ गया है। कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ रुपए है। यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनने जा रहा है, जो न केवल संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि रेलवे संचालन में भी नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। 







