जबलपुरभोपालमध्य प्रदेशराज्य

ईओडब्ल्यू भोपालने रिश्वतखोर लिपिकको रंगे हाथों गिरफ्तार किया

हरदा जिला परिवहन कार्यालयमें भ्रष्टाचार का पर्दाफाश

 

जबलपुर यश भारत। मध्य प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के तहत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), भोपाल ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए हरदा जिला परिवहन कार्यालय में कार्यरत लिपिक श्री सज्जन सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

 

शिकायतकर्ता की ओर से गंभीर आरोप, रिश्वत मांगने की पुष्टि

 

भोपाल के प्रतिष्ठित बस परिवहन व्यवसायी श्री सुरेंद्र तनवानी ने ईओडब्ल्यू में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी कि श्री सिंह ने उनके 15 साल पुराने वाहन (बस) (एमपी 47 पी 0164) का पंजीकरण रद्द करने के बदले 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

 

मप्र मोटरयान अधिनियम के अनुसार बस का 15 वर्षों का जीवनकाल समाप्त होने के बाद एवं जिसकी पंजीकरण रद्द करने की नियमानुसार फीस जमा की जा चुकी हो, उसका पंजीकरण स्वतः रद्द हो जाना चाहिए था, लेकिन लिपिक श्री सिंह ने इस कार्य को जानबूझकर लंबित रखते हुए रिश्वत की मांग की। पंजीकरण रद्द न होने की स्थिति में, बस का कमर्शियल वाहन में पंजीकरण होने के कारण, बस मालिक को प्रति सीट २०० रू टैक्स जमा करने की जिम्मेदारी बरकरार रहती। जब श्री तनवानी ने रिश्वत देने से इनकार किया, तो श्री सिंह ने उन्हें धमकी दी कि यदि वे रिश्वत नहीं देते, तो उन्हें हर माह 6,600 रुपये का टैक्स भरना पड़ेगा। यह धमकी आर्थिक रूप से बोझ डालने के इरादे से दी गई थी।

 

शिकायत प्राप्त होते ही ईओडब्ल्यूकी टीम ने तत्परता से कार्रवाई की और गुप्त सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई। जब यह पुष्टि हो गई कि आरोप सही हैं, तो एक विशेष टीम का गठन कियागया, जिसने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर श्री सिंह को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी के दौरान श्री सिंह की अलमारी से 1,00,000 रुपये की नकदी भी बरामद कीगई है, जिसके बारे पूछताछ की जा रही है। इसके तुरंत बाद ईओडब्ल्यू की टीमने श्री सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में विस्तृत जांच जारी है

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