प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को खाट पर लिटाकर 2 किलोमीटर एंबुलेंस तक ले गए परिजन: सड़क न होने से बनी समस्या

रीवा lमध्यप्रदेश के मऊगंज से आई ये खबर न सिर्फ तंत्र की असफलता उजागर करती है, बल्कि हमारे सिस्टम की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल तक पहुंचाने की बजाय, उसे दो किलोमीटर तक खाट पर लादकर ले जाना पड़ा… क्योंकि न एंबुलेंस समय पर पहुंची, न ड्राइवर ने गांव तक जाने की जहमत उठाई।और जब इस मामले को लेकर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से बात की गई तो उनके द्वारा कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया गया l
जिला मऊगंज, ग्राम कोन – में वर्षा साकेत को अचानक प्रसव पीड़ा हुई।परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन किया, मगर एंबुलेंस देर से पहुंची।और जब पहुंची… तो ड्राइवर ने गांव के अंदर आने से साफ मना कर दिया। बोले – “सड़क नहीं है, गाड़ी नीचे नहीं उतरेगी… ये आपकी समस्या है।”जब कोई और रास्ता नहीं बचा, तो परिजनों ने पड़ोसियों की मदद ली… एक खाट निकाली गई, और उसी पर लिटाकर महिला को करीब 2 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक लाया गया, जहां एंबुलेंस खड़ी थी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि एम्बुलेंस देर से आई और चालक गांव तक एम्बुलेंस लाने से मना कर दिया जिसके कारण गांव वालों को इकट्ठा करना पड़ा और खुद एंबुलेंस बनकर चारपाई से प्रसूता को एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा– और बताया गया कि गांव में आज तक पक्की सड़क नहीं बनी।बरसात में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन नतीजा – शून्य निकला
‘सड़क’, ‘स्वास्थ्य’, और ‘विकास’ जैसे शब्द गूंजते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत, इस चारपाई पर लेटी महिला की तरह — पूरी तरह बेबस और लाचार है।







