भोपाल

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करों के संपर्क में यासीन  – टेलीग्राम से तय करता था सौदा, नशे के आदि युवक युवतियों को बनाते थे निशाना

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करों के संपर्क में यासीन
– टेलीग्राम से तय करता था सौदा, नशे के आदि युवक युवतियों को बनाते थे निशाना
भोपाल यशभारत। हाईप्रोफाइल ड्रग्स तस्करी केस का मास्टर माइंड यासीन अहमद उर्फ मछली अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करों के संपर्क में था। अपने नेटवर्क को बढ़ाने की कोशिश में भी जुटा था। खास बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म टेलीग्राम और मैसेंजर के जरिए ड्रग्स की खेप का सौदा करता था। यासीन मुंबई, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब के साथ ही नाइजीरिया में ड्रग डीलिंग कर रहा था। यासीन के गिरोह के 15 गुर्गों की गिरफ्तारी अब तक क्राइम ब्रांच की टीम कर चुकी है। यासीन और उसका चाचा केंद्रीय जेल में बंद हैं तो वहीं अंशुल भूरी को भी जेल भेजा जा चुका है।
नेटवर्क में जोडक़र बनाता था लत का शिकार
पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ है कि पब व क्लब में आने वाले युवक युवतियों को पहले ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क में जोड़ा जाता था और उसके बाद उन्हें लत का शिकार बनाया जाता था। ड्रग डीलिंग के लिए टेलीग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग करना भी सिखाया जाता था। प्रशिक्षित होने के बाद ही ड्रग्स की खेप सप्लाई की जाती थी। विश्वास बनने के बाद ड्रग्स पहुंचा दी जाती थी।

गुर्गे लेकर आ रहे थे ड्रग्स की तस्करी
पूछताछ के दौरान आरोपियों से कई महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी है। सूत्रों के मुताबिक ५० से अधिक लोग ड्रग्स तस्करी का काम कर रहे थे। राजस्थान, दिल्ली और पंजाब से ड्रग्स की खेप लेकर आते थे। खस बात तो यह है कि पूरा नेटवर्क एक सर्किट की तरह काम करता था। एक स्थान से दूसरे स्थान तक ड्रग्स को लाने के लिए पूरा सर्किट तैयार किया जाता था। यानि खेप को कहीं रोका नहीं जाता था, ड्रग्स तस्कर खेप को सीधे यासीन के पास ही लेकर आते थे।
नशे के शौकीनों को बनाया जाता था निशाना
बताया जा रहा है कि ड्रग्स तस्करों का गिरोह ऐसे युवक युवतियों को निशाना बनाता था जो पहले से ही नशे के आदि हों। शराब या अन्य नशे के आदि लोगों को धीरे धीरे ड्रग्स की लत का शिकार बनाया जाता था। पब व क्लबों में गिरोह के सदस्य पहले से ही मौजूद रहते थे और अपनी बातों में उलझाकर शिकार बनाते थे। गुर्गे भोपाल के अन्य स्थानों पर खेप को पहुंचाने का काम भी कर रहे थे।
सात से दस हजार रुपए वसूले जाते थे
पूछताछ में सामने आया है कि दोस्ती होने के बाद पहले फ्री में ड्रग्स दिया जाता था और लत का शिकार होने के बाद सात से दस हजार रुपए तक वसूले जाते थे। विदेशी नागरिकों से ड्रग डील के सबूत यासीन और अंशुल के मोबाइल फोन में मिले हैं। साथ ही नाइजीरियन युवकों से ड्रग डीलिंग के संबंध में बातें हैं।
पूछताछ की जा रही है
ड्रग्स तस्करी के आरोपियों से गहन पूछताछ की गई है। पंाच राज्यों में भी नेटवर्क जोड़ा था। कई लोगों से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।
– शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशन डीसी, क्राइम ब्रांच भोपाल

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