जबलपुरदेशभोपालमध्य प्रदेशराज्य

यशभारत ने छापेमारी की खबर का सबसे पहले किया खुलासाः मुंबई ईडी ने जबलपुर समेत चार जिलों में मारा छापा, दो गिरफ्तार

7 किलो सोना, 62 किलो चांदी, 1.18 करोड़ नकद, 9.2 करोड़ की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य जब्त मेसर्स मैग्नेटेल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी ने की साइबर धोखाधड़ी

जबलपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स मैग्नेटेल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी द्वारा की गई साइबर धोखाधड़ी गतिविधियों की चल रही जांच को लेकर जबलपुर, अहमदाबाद, जयपुर, और पुणे में स्थित कई ठिकानों पर छापामारी कर दी। गोपनीय तरीके से पूरी कार्यवाही को अंजाम दिया गया इस कार्रवाई की किसी को कानों-कान खबर नहीं थी। दो लोगों को गिरफ्तार करने के बाद चली सर्चिंग के दौरान, 7 किलोग्राम सोना, 62 किलोग्राम चांदी, 1.18 करोड़ रुपये नकद, 9.2 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज, फर्जी कॉल सेंटर के संचालन से संबंधित डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।

 

WhatsApp Image 2025 07 14 at 11.51.48
फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया-

ईडी ने पुणे साइबर पुलिस द्वारा मेसर्स मैग्नेटेल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी नाम से एक फर्जी कॉल सेंटर चलाने में कथित रूप से शामिल आठ व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की हैं। पुणे स्थित प्राइड आइकॉन बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से जुलाई 2024 से संचालित उक्त कॉल सेंटर पर एक फर्जी ऋण योजना के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप है।

ऋण देने का झूठा वादा कर जुटाया ब्यौरा-
ईडी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपियों ने बैंकों के प्रतिनिधि बनकर ऋण देने का झूठा वादा किया। इस धोखे का इस्तेमाल करके, उन्होंने अमेरिकी नागरिकों के बैंक खातों का विवरण और अन्य जानकारी हासिल कर ली। फिर इन जानकारियों का इस्तेमाल धन हस्तांतरण के लिए किया गया।

संजय-अजीत जयपुर से दबोचे गए-
मामले में मेसर्स मैग्नेटेल बीपीएस कंसल्टेंट्स एंड एलएलपी के दो साझेदारों संजय मोरे और अजीत सोनी को जयपुर से गिरफ्तार किया गया। धोखाधड़ी की गई राशि, जो अनुमानित रूप से लाखों अमेरिकी डॉलर में है, अमेरिका स्थित सहयोगियों के माध्यम से भेजी गई और बाद में क्रिप्टोकरेंसी, मुख्य रूप से यूएसडीटी के रूप , में बदल दी गई। इस प्रकार डिजिटल संपत्तियों को ट्रस्ट वॉलेट और एक्सोडस वॉलेट सहित क्रिप्टो वॉलेट में संग्रहीत किया गया।

खच्चर खातों के जरिए हेराफेरी-
ईडी की जाँच से पता चला कि अपराध की आय भारत में स्थानांतरित की गई और पारंपरिक अनौपचारिक माध्यमों का उपयोग करके अहमदाबाद में भुनाई गई। धोखाधड़ी से मिले लाभ का एक हिस्सा फिर खच्चर खातों के माध्यम से कंपनी के बैंक खातों में जमा किया गया, जिनका उपयोग मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर खरीदने और उस कार्यालय परिसर के किराए के भुगतान के लिए किया गया जहाँ से धोखाधड़ी की गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं। धन का एक बड़ा हिस्सा व्यक्तिगत संपत्ति जैसे सोना-चाँदी, आभूषण, वाहन और अचल संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button