
मुंबई लोकल में हिंसा बढ़ी, मामूली विवाद बन रहे जानलेवा
मुंबई, यश भारत । मुंबईकरों की जीवनरेखा मानी जाने वाली लोकल ट्रेनों में बीते कुछ दिनों से छोटे-छोटे विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं। मामूली कहासुनी से शुरू होने वाले झगड़े अब गंभीर हमलों में बदलते जा रहे हैं, जिनमें कुछ यात्रियों की जान जा रही है तो कई गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
बांद्रा स्टेशन पर हाल ही में ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। लोकल ट्रेन में सीट को लेकर हुए विवाद के बाद एक युवक ने रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाकर डिब्बे की ओर फेंक दिया। पत्थर विवाद में शामिल यात्री को लगने के बजाय निशांत खत्री नामक युवक की आंख पर जा लगा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना रात करीब 11 बजे प्लेटफॉर्म संख्या 5 पर हुई, जब ट्रेन अंधेरी से दादर की ओर जा रही थी। इस मामले में आरोपी योगेंद्र वंशराज बौद्ध (23) को दादर से गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई का नेतृत्व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक शहाजी निकम और उपनिरीक्षक एम. बी. बच्छाव की टीम ने किया।
इसी बीच, लोकल ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। 3 फरवरी को दादर–मुलुंड मार्ग पर महिलाओं के डिब्बे के पास स्थित दिव्यांग कोच में एक वृद्ध व्यक्ति पर महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है।
इससे पहले ठाणे–कल्याण मार्ग पर भाषा विवाद के चलते 19 वर्षीय छात्र अर्णव जितेंद्र खैरे के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। कथित रूप से इस घटना से उत्पन्न मानसिक आघात के कारण उसने घर पर आत्महत्या कर ली। वहीं, मालाड स्टेशन पर गेट से चढ़ने–उतरने के विवाद में एक कॉलेज प्राध्यापक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी।
लगातार बढ़ती भीड़, अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और त्वरित नियंत्रण की कमी के कारण लोकल यात्रा दिन-ब-दिन असुरक्षित होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और जनजागरूकता अभियान चलाना समय की आवश्यकता है। मुंबईकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त और ठोस कदम उठाए जाने जरूरी हैं।







