वर्ल्ड थिएटर डे पर भोपाल में बोले दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी: थिएटर में ‘हाउसफुल के लिए पहले नाम कमाना होगा, रातों-रात नहीं मिलती सफलता

वर्ल्ड थिएटर डे पर भोपाल में बोले दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी: थिएटर में ‘हाउसफुल के लिए पहले नाम कमाना होगा, रातों-रात नहीं मिलती सफलता
भोपाल, यशभारत। थिएटर कोई जादू की छड़ी नहीं है कि आपने आज शुरू किया और कल हॉल हाउसफुल हो जाए। यह एक लंबी साधना है। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको देखने आएं, तो पहले आपको अपना नाम बनाना होगा और वह सिर्फ लगातार काम करने से ही संभव है। यह बेबाक बात मशहूर अभिनेता और रंगकर्मी राकेश बेदी ने वर्ल्ड थिएटर डे के मौके पर भोपाल में कही।
वे यहाँ अपने लोकप्रिय सोलो नाटक ‘मसाज’ के मंचन के लिए पहुंचे थे। विश्व रंगमंच दिवस पर अपनी प्रस्तुति को उन्होंने एक सुखद संयोग बताया और शहर के कला प्रेमियों से थिएटर की चुनौतियों और बारीकियों पर दिल खोलकर बात की।
1974 से आज तक: अनवरत यात्रा
अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए बेदी ने बताया कि वे 1976 में फिल्म इंस्टीट्यूट से पासआउट हुए, लेकिन नाटक वे 1974 से ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कभी काम नहीं रोका। जब आप लगातार रंगमंच से जुड़े रहते हैं, तो न केवल आपकी पहचान बनती है, बल्कि अवसर भी खुद-ब-खुद बढ़ते चले जाते हैं। आर्थिक चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन धैर्य ही इसका समाधान है।
किरदार को ओढ़ना नहीं, जीना पड़ता है
हाल ही में चर्चित हुए अपने किरदार जमीर के पुरंदर की तैयारी पर उन्होंने कहा कि अभिनय केवल बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आंतरिक मेहनत है। उन्होंने बताया, मैंने सिर्फ यह नहीं देखा कि वह कैसा दिखता है, बल्कि यह समझा कि पाकिस्तान के राजनेता बात कैसे करते हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज और लहजा क्या है। जब आप किरदार की रूह को पकड़ लेते हैं, तो अभिनय स्वाभाविक लगने लगता है।
मां के लिए सभी बच्चे बराबर
जब उनसे उनके पसंदीदा किरदार’ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए इस सवाल को बेईमानी करार दिया। उन्होंने कहा, एक अभिनेता से उसका पसंदीदा किरदार पूछना वैसा ही है जैसे किसी मां से उसके सबसे प्रिय बच्चे का नाम पूछना। मेरे लिए हर किरदार की अपनी अहमियत और यादें हैं।
मीडिया से चर्चा के दौरान राकेश बेदी काफी अनुशासित नजर आए। उन्होंने चर्चा को संक्षिप्त रखते हुए कहा, मेरा दो घंटे का सोलो नाटक है। मंच पर पूरी ऊर्जा और फोकस बनाए रखने के लिए मुझे अपनी शक्ति बचाकर रखनी होगी।







