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ट्रंप का टैरिफ वार: दवाओं पर 100% शुल्क, मेटल नियमों में ढील—भारत पर क्या असर?

क्या है अमेरिका का मकसद?

वाशिंगटन डी.सी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए दवाओं के आयात पर कड़ा रुख अपनाया है। नए टैरिफ ढांचे के तहत अमेरिका ने पेटेंट वाली दवाओं पर 100% शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिससे भारत सहित कई देशों के फार्मा निर्यात पर असर पड़ सकता है।

क्या है नया नियम?

अमेरिकी सरकार के अनुसार, जिन देशों ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग के साथ रीशोरिंग समझौता या स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के साथ MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) मूल्य समझौता नहीं किया है, वहां से आयातित पेटेंट दवाओं पर 100% टैरिफ लगेगा।
यह नियम खासतौर पर उन कंपनियों पर लागू होगा, जो अमेरिका में उत्पादन शिफ्ट नहीं कर रही हैं।

भारत के लिए राहत और खतरा

फिलहाल भारत की ज्यादातर निर्यात होने वाली जेनेरिक दवाएं इस टैरिफ से बाहर रखी गई हैं।
लेकिन अधिकारियों ने साफ किया है कि अगर जेनेरिक दवा कंपनियां उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट नहीं करतीं, तो भविष्य में उन पर भी शुल्क लगाया जा सकता है।

कब से लागू होगा?

बड़ी कंपनियों के लिए: 31 जुलाई
छोटी कंपनियों के लिए: 29 सितंबर

⚙️ मेटल्स पर क्या बदला?

दूसरी ओर, मेटल्स से जुड़े उत्पादों के नियमों में राहत दी गई है:

जिन उत्पादों में धातु 15% से कम है—उन पर अलग मेटल टैरिफ नहीं लगेगा
15% से अधिक धातु होने पर पूरे उत्पाद पर 25% का समान शुल्क लागू होगा

क्या है अमेरिका का मकसद?

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य जरूरी दवाओं के लिए विदेशी निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन (रीशोरिंग) को बढ़ावा देना है।

कुल मिलाकर, यह फैसला वैश्विक फार्मा व्यापार में बड़ा बदलाव ला सकता है, जिसमें भारत जैसे बड़े निर्यातक देशों को रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

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