भोपालमध्य प्रदेश

सफेदपोशों की नगरी में किसकी चल रही यह बड़ा सवाल – मोदी के दौरे के बाद बदलेंगी क्या कुर्सियां, इसकी माने

सफेदपोशों की नगरी में किसकी चल रही यह बड़ा सवाल
– मोदी के दौरे के बाद बदलेंगी क्या कुर्सियां, इसकी माने
भोपाल यशभारत। प्रदेश की दशा और दिशा तय करने वाली राजधानी खुद ही हमेशा निश्चिंतता में नहीं रहती है। यह स्थिति प्रशासनिक अमले की है। सत्ता का केंद्र कहां है किसकी कितनी चल रही है। किसको कितनी तवज्जो मिल रही यह चर्चा हमेशा सफेद पोशों के बीच होती रहती है। आलम यह है कि अब उनकी चल रही है अब इनकी चल रही है इसी में भोपाल का दिन कटता है। सत्ता का केंद्र कहां है कहां जाएगा इसी में भोपाल में गपशप का दौर जारी है। हाल ही में भोपाल में यह तय माना जा रहा था कि प्रशासनिक सर्जरी भोपाल में बड़े पैमाने में होने वाली है, किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से यह संभव नहीं हो पाई गोकी यह भी तय नहीं था कि वाकई में हो रही है।
लोकतांत्रिक जमाने में राजधानी में पदस्थ होना काफी महत्वपूर्ण होता है। एक उम्र तक आईएएस और आईपीएस अधिकारी फील्ड में रहने के लिए काफी कवायद करते हैं। पदोन्नति के साथ जब भोपाल ठिकाना तय हो जाता है तब यह मंशा रहती है कि भोपाल के महत्वपूर्ण पदों पर रहकर प्रदेश के हित में अच्छे निर्णय ले सकें। इन महत्वपूर्ण पदों पर बैठने के लिए राजनैतिक पहुंच की सख्त जरूरत पड़ती है। इन परिस्थितियों के चलत अपनी कार्यप्रणाली को अधिकारी हमेशा मजबूत रखना चाहता हैं। जिससे जिस उद्देश्य से वे आम नागरिकों को राहत भरे निर्णय दे सके। सत्ता का केंद्र तो एक ही जगह होता है लेकिन उसकी शाखाएं बहुत सारी जगह होती हैं। इन शाखाओं का अपना अपना महत्व है। महत्व के तहत ही कुर्सी को सलाम होता है। सलाम और जी सर के बीच पदों पर बैठने का रस्साकशी का दौर आम चलन में है। वर्तमान में प्रशासनिक सर्जरी को लेकर काफी चर्चा है। जिनकी सत्ता में थोड़ी भी चहलकदमी है वे दावे के साथ ही कि यहां से वहां वहां से यहां वो पहुंचने वाले हैं। वो पहुंचे ना पहुंचे लेकिन जो पद पर बैठे हैं वे परेशान हो रहे हैं। बहरहाल राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि सबको काम करने का मौका मिलता है। अब देखना यह है कि मोदी जी के जाने के बाद प्रशासनिक सर्जरी किस स्तर की होती है।

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