टॉर्चर के दौरान खिलाते थे मांस, 20 घंटे पीटते थे

टॉर्चर के दौरान खिलाते थे मांस, 20 घंटे पीटते थे
– मालेगांव ब्लास्ट केस के मुख्य आरोपी रहे समीर शरद कुलकर्णी का बड़ा बयान
– 17 साल के न्यायिक संघर्ष के बाद मिली राहत, लेकिन सवाल बरकरार
– गुनाह किया होता तो सबूत पेश करते, टॉर्चर की जरूरत क्यों थी
आशीष दीक्षित,भोपाल। मालेगांव ब्लास्ट केस के प्रमुख आरोपियों में रहे समीर शरद कुलकर्णी ने 17 वर्षों के लंबे न्यायिक संघर्ष के बाद अपने अनुभवों को यशभारत से साझा किया। उन्होंने मुंबई एटीएस और कांग्रेस की तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए धमाके के बाद उन्हें और अन्य आरोपियों को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया जबकि वे निर्दोष थे। कुलकर्णी के मुताबिक 31 जुलाई 2025 को न्यायालय ने उन्हें निर्दोष करार दिया है। उन्होंने कहा कि हम पहले दिन से ही निर्दोष थे, इसलिए किसी वकील की सेवा नहीं ली। अब जब न्यायालय ने भी ठप्पा लगा दिया है, तब पीडि़त पक्ष के वकीलों ने मुंबई उच्च न्यायालय में अपील की है। हमें भरोसा है कि वहां भी हमें निर्दोष साबित किया जाएगा। वे सर्वोच्च न्यायालय भी जाएंगे, लेकिन सत्य की जीत होगी उन्होंने कहा।
टॉर्चर किया, मांस खिलाया
भोपाल में आयोजित सनातन संबोधन कार्यक्रम में शामिल होने आए कुलकर्णी ने यशभारत से चर्चा में बताया कि उन्हें अवैध तरीके से 28 अक्टूबर 2008 को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। जबकि मुंबई पुलिस का कार्यक्षेत्र यहां नहीं था, फिर भी हमें यहां से उठाया गया। 24 घंटे में 20 घंटे तक पीटा जाता था। हम सभी शाकाहारी थे, लेकिन पूछताछ के दौरान हमारे मुंह में जबरन मांस के टुकड़े डाले जाते थे।
सरकारी गवाह बनने और संतों, नेताओं का नाम लेने का बनाया दबाव
कुलकर्णी ने बताया कि उनसे सरकारी गवाह बनने और कई संतों व नेताओं के नाम लेने के लिए दबाव बनाया गया। टाचर्ज के दौरान मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ सहित अन्य संतों के नाम लेने को कहा गया। जब हमने नाम नहीं लिए, तब हमें आरोपी बनाया गया।
17 साल की पीड़ा के लिए कौन जिम्मेदार ?
कुलकर्णी ने कहा कि 1036 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई, लेकिन एफआईआर सिद्ध नहीं हो सकी, न ही साजिश साबित हुई। मौके पर मिली बाइक भी साध्वी की नहीं थी। हमारी आस्था को ‘भगवा आतंकवाद’ कहकर बदनाम किया गया। 17 साल की पीड़ा के लिए कौन जिम्मेदार है?
धर्मपरायण सरकार रहे, कोई ब्लास्ट नहीं होंगे
उन्होंने कहा हम प्रार्थना करते हैं कि जब तक धर्मपरायण, राष्ट्रभक्त सरकार रहेगी, तब तक भारत भूमि पर कोई बम ब्लास्ट नहीं होगा और न ही किसी निरपराध हिंदू का वक्त बरबाद होगा। हम अपनी आस्था के अस्तित्व, सनातन धर्म और भगवा ध्वज के लिए मरने को तैयार हैं।
मालेगांव ब्लास्ट केस
– घटना – 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक धमाका हुआ, जिसमें कई लोग मारे गए और घायल हुए।
– आरोप – कुल 16 आरोपियों को चार्जशीट किया गया, जिनमें 14 गिरफ्तार हुए और 2 को वांटेड घोषित किया गया।
– जांच एजेंसियां – मामले की जांच महाराष्ट्र एटीएस और बाद में एनआईए ने की।
– कुलकर्णी की गिरफ्तारी – 28 अक्टूबर 2008 को भोपाल से की गई।
– कानूनी स्थिति – 17 वर्षों तक मुकदमे की सुनवाई चली। 31 जुलाई 2025 को न्यायालय ने कई आरोपियों को निर्दोष करार दिया।







