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मंडी में खरीदी गई धान के स्टॉक में हो रहा गोलमाल फर्जी अनुज्ञा के आधार पर दिखा रहे डिस्पैच, 

समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कागजों पर सप्लाई दूसरे प्रदेश में, भंडारण जिले की गोदामों में

मंडी में खरीदी गई धान के स्टॉक में हो रहा गोलमाल फर्जी अनुज्ञा के आधार पर दिखा रहे डिस्पैच, 

समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कागजों पर सप्लाई दूसरे प्रदेश में, भंडारण जिले की गोदामों में

जबलपुर, यशभारत। पिछले एक महीने से जबलपुर कृषि उपज मंडी और सिहोरा कृषि उपज मंडी में धान की बंपर आवक हो रही है। दोनों ही मंडियों में 15 से 20 हजार क्विंटल धान की प्रतिदिन ओपन ऑक्शन में खरीदी की गई है, जिसकी ज्यादातर मात्रा महाराष्ट्र और दक्षिण के राज्यों में भेजना बताया गया है। लेकिन वास्तविकता में इस धान का बहुत बड़ा स्टॉक कृषि उपज मंडी परिसर की गोदामों और जिले की अन्य गोदामों में मौजूद है, जिसे अब सरकारी खरीद में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने की तैयारी की जा रही है। यह है कारण जिले में पिछले 1 महीने से धान मंडी ऑक्शन में 1700 से 1800 रुपए प्रति बि फार्म वी सारी डा क्विंटल के भाव से बिक रही है, वहीं सरकार इसी धान को सरकारी खरीदी के माध्यम से 2365 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदेगी। ऐसे में मंडी के व्यापारियों द्वारा मनमाने दाम पर धान को खरीदकर स्टॉक कर लिया गया है और अब उसे सरकारी खरीद में बेचने की तैयारी चल रही है, जिसमें खर्चा काटकर उन्हें 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल का मुनाफ होगा। जबकि प्रशासन द्वारा गैर-कानूनी स्टॉक को सील करने के आदेश पहले से दिए हुए हैं। ऐसे होता है खेल व्यापारियों द्वारा जो धान ऑक्शन में खरीदी जाती है, उसे मंडी से बाहर निकालने के लिए एक अनुज्ञा की आवश्यकता होती है, जो मंडी सचिव के कार्यालय से जारी की जाती है। इसमें सभी जानकारियां दर्ज होती हैं कि उक्त स्टॉक को कहाँ और कितनी मात्रा में भेजा जा रहा है। व्यापारियों द्वारा खरीदी गई धान की अनुज्ञा दूसरे प्रदेशों के नाम से बनवा ली जाती है। इसमें से थोड़ी-बहुत मात्रा उन प्रदेशों में भेज दी जाती है, जबकि बहुत बड़ी मात्रा का स्टॉक या तो मंडी परिसर में या मंडी के बाहर की गोदामों में रखा गया है। इन बिंदुओं पर हो जांच इस पूरे मामले में यदि प्रशासन पिछले एक महीने में खरीदी गई धान के स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कर ले, और जिन अनुज्ञाओं के आधार पर धान को मंडी से बाहर निकाला गया है, उन अनुज्ञाओं के ट्रक नंबरों की जांच करे, तथा जिन प्रदेशों में धान भेजा जाना बताया गया है, वहाँ के रूट की टोल पर्चियों की जांच करे, तो पूरा मामला साफहो सकता है जैसे पिछले साल कस्टम मिलिंग में धान हेराफेरी के दौरान चोरी पकड़ी गई थी। साथ ही, मंडी के सभी एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर लगे उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों के फुटेज से भी सच्चाई प्रमाण सहित सामने आ सकती

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