जबलपुरभोपालमध्यप्रदेश

, समिति और आमजन की नैतिकता भी बेहद जरूरी

जबलपुर। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर संस्कारधानी जबलपुर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। पंचमी के बाद से ही शहर के प्रमुख दुर्गा पंडालों, सिद्ध मंदिरों और व्यक्तिगत स्तर पर जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन इन आयोजनों के बाद सड़कों और डिवाइडरों पर बिखरने वाला कचरा शहर की स्वच्छता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

नगर निगम मुस्तैद, लेकिन केवल सरकारी प्रयास नाकाफी

जबलपुर नगर निगम की स्वच्छता टीमें व्यवस्था को संभालने के लिए लगातार सक्रिय हैं। सफाई कर्मचारी देर रात से लेकर अलसुबह तक सड़कों पर उतरकर कचरा उठाने और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद, केवल नगर निगम के भरोसे पूरे शहर को स्वच्छ रख पाना संभव नहीं है।

आयोजक समितियों की नैतिक जिम्मेदारी: कचरा प्रबंधन और डस्टबिन अनिवार्य

ज्यादातर भंडारा आयोजक आयोजन के बाद अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं। शहर में इक्का-दुक्का स्थलों को छोड़कर कहीं भी पर्याप्त डस्टबिन (कूड़ादान) की व्यवस्था नहीं की गई है। आयोजक समितियों का यह पहला नैतिक कर्तव्य है कि वे भंडारे के आयोजन के साथ-साथ दोना-पत्तल और गिलास के उचित निस्तारण का इंतजाम भी करें।

नागरिकों का भी नैतिक धर्म: प्रसाद के बाद स्वच्छता का रखें ध्यान

स्वच्छता बनाए रखने में आम जनता और श्रद्धालुओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद दोना-पत्तल सड़कों या डिवाइडरों पर फेंकने के बजाय कूड़ेदान में डालना हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। धर्म और आस्था के इस महान पर्व पर भक्ति के साथ-साथ स्वच्छता का संकल्प लेना भी हम सभी का परम धर्म है।

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