सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आंध्र और तेलंगाना में परिसीमन याचिका खारिज, जम्मू-कश्मीर परिसीमन पर मुहर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में नई परिसीमन प्रक्रिया की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए किए गए परिसीमन को वैध ठहराया है।
आंध्र-तेलंगाना में 2026 के बाद ही परिसीमन
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार, अगली परिसीमन प्रक्रिया केवल 2026 के बाद होने वाली जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर ही की जा सकती है। इस फैसले के साथ, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तत्काल नई विधानसभा सीटों के परिसीमन की उम्मीदें समाप्त हो गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इन दोनों राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और सीटों के पुनर्गठन की मांग की थी, जिसे अदालत ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया।
जम्मू-कश्मीर के लिए अलग परिसीमन वैध
इसके विपरीत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के लिए किए गए अलग से परिसीमन को वैध ठहराया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार को वहां की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए अलग से परिसीमन करने का अधिकार है। गौरतलब है कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, वहां विधानसभा सीटों का परिसीमन किया गया था, जिस पर कई सवाल उठाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही अनिश्चितता काफी हद तक दूर हो गई है।
संवैधानिक प्रावधानों पर आधारित निर्णय
अदालत ने अपने निर्णय में इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही परिसीमन किया जाना चाहिए, और ये प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि अगली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य में परिसीमन संभव होगा। यह फैसला भविष्य में अन्य राज्यों में परिसीमन की मांगों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।







