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कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत, FIR दर्ज करने का हाई कोर्ट का आदेश निरस्त

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। यह मामला भोपाल स्थित इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज के संचालन और कथित फर्जी सेल डीड से जुड़ा बताया गया है।
दरअसल, हाई कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में भोपाल के पुलिस आयुक्त को विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। साथ ही पुलिस महानिदेशक को इस मामले में एसआईटी गठित कर जांच कराने के लिए भी कहा गया था। हाई कोर्ट के इस आदेश को आरिफ मसूद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अरुण चंद्राकर की खंडपीठ ने कहा कि इस प्रकार के मामले में बिना सभी पक्षों की दलील सुने सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना उचित नहीं था। अदालत ने माना कि हाई कोर्ट द्वारा दिया गया अंतरिम आदेश आवश्यक नहीं था।
सुनवाई के दौरान आरिफ मसूद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि हाई कोर्ट ने राज्य सरकार का जवाब आने से पहले ही एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दे दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि यह याचिका हाई कोर्ट में पहले से लंबित है, इसलिए सभी पक्ष जल्द से जल्द अपनी दलीलें पूरी करें और हाई कोर्ट मामले के मेरिट के आधार पर अंतिम निर्णय दे।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने जांच के बाद इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज, भोपाल की मान्यता 30 जून 2025 को निरस्त कर दी थी। इसी मामले को लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद हाई कोर्ट पहुंचे थे। हाई कोर्ट से राहत मिलने के बजाय उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया

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