जबलपुरमध्य प्रदेशराज्य

जबलपुर में दिव्यांगता का ऐसा मजाक कि ट्रायसाइकिल लेने पिता के कंधे पर बैठकर पहुंचा दिव्यांग…..देखे पूरा वीडियो

70 किलोमीटर दूर से आए दिव्यांग सुकरण की कलेक्टर ने सुनी व्यथा

 

जबलपुर, यशभारत। दिव्यांगता अभिशाप नहीं है, क्योंकि सरकार और प्रशासनिक अमला पूरी सहानभूति के साथ उनके साथ खड़ा है। समय-समय पर दिव्यांगों के उत्थान के लिए काम होता है। लेकिन मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जो दृश्य देखने को मिला उससे तो लग रहा है कि जबलपुर में दिव्यांगों के साथ मजाक किया जा रहा है। पिता के कंधों पर बैठकर कलेक्टर से मिलने पहुंचे कुंडम के मखरार निवासी दिव्यांग सुकरण की कहानी जिसने भी सुनी वह स्तब्ध रह गया।

100

दरअसल दिव्यांग सुकरण को स्कूल आने-जाने के लिए ट्रायसाइकिल चाहिए थी वह इस पाने के लिए कई सालों से संघर्ष कर रहा था। स्थानीय स्तर के अधिकारियों ने जब उसे ट्रायसाइकिल उपलब्ध नहीं कराई तो वह पिता के कंधों पर सवार होकर 70 किलोमीटर कुुंडम के मखरार गांव से जबलपुर चला आया। यहां पहुंचकर दिव्यांग छात्र ने कलेक्टर को पूरी व्यथा सुनाई। कलेक्टर ने दिव्यांग की बातों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल उसे ट्रायसाइकिल उपलब्ध कराई।

101

छात्र ने बताया कि अपने गांव से स्कूल के लिए उसे 5 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता है। कभी बस से तो कभी जीप से छात्र सुकरन को मखरार से मड़ई गाँव तक पढऩे के लिए आना पड़ता है। कई बार तो ऐसे हालात बने कि सुकरन को मड़ई गाँव से बस नही मिलती थी तो वह अपने दोस्त के यहां रुक जाता था।

102

कलेक्टर ने घुटने में बैठकर सुनी समस्या

जिस तरह सुकरण अपने पिता के कंधों पर सवार ट्रासाइकिल पाने के लिए जबलपुर तक पहुंचा ऐसे बहुत से दिव्यांग होंगे जो प्रशासनिक पंगुता के कारण सरकार की सुविधाओं से वंचित है। घुटने पर बैठकर कलेक्टर ने दिव्यांग छात्र की समस्याएं  सुनी।

103

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button