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जांच में स्टॉक पूरा FIR में 43 करोड़ की अफरा तफरी

जांच में स्टॉक पूरा FIR में 43 करोड़ की अफरा तफरी

जांच में स्टॉक पूरा FIR में 43 करोड़ की अफरा तफरी

जबलपुर, यश भारत। धान अफरा तफरी मामले में 16 राइस मिलर और अधिकारी कर्मचारियों पर दर्ज हुए मामले के बाद अब नई-नई जानकारियां निकाल कर सामने आ रही हैं। इस पूरे मामले में एक तरफ जहां प्रशासन द्वारा 43 करोड़ 2 लाख की धान अफ़रा तफरी की बात की जा रही है वहीं दूसरी तरफ शासन का ही एक पत्र बता रहा है कि उक्त राइस मिलों में जांच के द्वारा स्टॉक पूरा मिला था। जिसको लेकर पंचनामा भी तैयार किया गया था जो पंचनामा अधिकारियों के साथ-साथ राइस मिलों के पास भी मौजूद है। जिसको लेकर 9 मई को खाद्य विभाग की तरफ से अपर मुख्य सचिव नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को भेजा गया था जिसमें बताया गया था कि जांच के दौरान सभी राइस मिलों में स्टॉक पूरा पाया गया है, जो पत्र जांच दल के प्रतिवेदन और वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश के बाद भेजा गया था। ऐसे में अब इतनी बड़ी अफ़रा तफरी की बात सवालों के घेरे में है।

जांच दल ने किया था मूल्यांकन

जानकारी के मुताबिक 28 मार्च को भोपाल से पत्र आया था जिसमें सभी राइस मिलों की जांच की बात कही गई थी। जिसके बाद जबलपुर कलेक्टर द्वारा एक जांच दल बनाया गया था जिसमें हर क्षेत्र के एसडीएम को भी शामिल किया गया था साथ ही साथ वेयरहाउसिंग और सहकारिता के अधिकारी भी शामिल थे जिनकी मौजूदगी में राइस मिलों का भौतिक सत्यापन किया गया था और इस पूरी टीम के द्वारा जिले में लगभग 40 राइस मिलों में स्टॉक पूरा बताया गया था और अब उसके बाद 43 करोड़ 2 लाख की अफ़रा तफरी की बात सामने आ रही है ऐसे में उस जांच दल की रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। जिसमें उपार्जन से जुड़े सभी अधिकारी मौजूद थे। हालांकि इस जांच में सिर्फ स्टॉक का वेरिफिकेशन किया गया था जिसमें परिवहन के तकनीकी बिंदुओं की जांच नहीं की गई थी ।

 

बाकी जगह खामोशी

28 मार्च को जो पत्र भोपाल से भेजा गया था उसमें अपर मुख्य सचिव के द्वारा पूरे प्रदेश में राइस मिलों की जांच करके प्रतिवेदन भोपाल बुलवाया गया था । यह आदेश सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं था लेकिन कार्यवाही सिर्फ जबलपुर तक सीमित है ऐसे में सवाल उठता है कि जबलपुर के सभी राइस मिलर गोलमाल में शामिल थे और बाकी प्रदेश में कहीं कोई इस तरह का गोलमाल नहीं हुआ या फिर जबलपुर में ही कार्यवाही हुई है और बाकी जगह प्रशासन खामोश बैठा है।

तकनीकी खामी या चोरी

जांच दल की रिपोर्ट और एफ आई आर में बताई गई 43 करोड़ 2 लाख की धान गोलमाल की बात में अब सवाल उठने लगा है कि यह वास्तव में चोरी है या फिर कोई तकनीकी चूक। क्योंकि एक तरफ जहां जांच दल की रिपोर्ट बता रही है कि उक्त धान का चावल बड़ी मात्रा में बनाकर आपूर्ति निगम और फूड कॉरपोरेशन आफ इंडिया में जमा किया गया है वहीं दूसरी तरफ जो मामले दर्ज करे गए हैं उसमें अफरा तफरी की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले में धान बेचकर पुराना चावल जमा करने की बातें भी सामने आ रही है। इसको लेकर फूड कॉरपोरेशन आफ इंडिया और नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा होने के पहले चावल का ऐज टेस्ट किया जाता है। जिससे यह पता चलता है कि चावल नया है या पुराना चावल। पुराना चावल होने पर रिजेक्ट कर दिया जाता है यदि पुराना चावल जमा किया गया है तो फिर ऐज टेस्ट पर भी सवाल उठना लाजिमी है और यदि चावल नया है तो फिर शासन की कार्यवाही पर सवाल उठेगा। कुल मिलाकर यह पूरा मामला आरोप प्रत्यारोप के बीच उलझता नजर आ रहा है। जिसमें एक पक्ष शासन पर मनमानी का आरोप लगा रहा है, वही दूसरी तरफ शासन हेरा फेरी की दलील दे रहा है।

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