वरिष्ठ साहित्यकार , पत्रकार डॉ.राजकुमार तिवारी सुमित्र पंचतत्व में विलीन

जबलपुर , यशभारत।प्रतिष्ठित साहित्यकार, लगभग 40 कृतियों के रचयिता, पाथेय साहित्य कला अकादमी के संस्थापक कविवर डॉ. राजकुमार तिवारी सुमित्र का आज 27 फरवरी 2024 को रात्रि 10 बजे निधन हो गया।आप डॉ.हर्ष कुमार तिवारी के पिता थे ।अंतिम यात्रा उनके निवास स्नेहनगर, गेट नंबर चार से दोपहर 12 बजे रानीताल मुक्तिधाम पहुंची जहां समाज के सभी वर्ग के लोगों ने उन्हें अश्रुपूरित अंतिम विदाई दी। डॉ.सुमित्र ने अनेक समाचार पत्रों में सम्पादकीय सेवाएं दी ।आप प्रदेश ही नहीं अपितु देश की साहित्यिक धारा के संवाहक रहे। लगभग 6 दशक उन्होंने साहित्य की अप्रतिम सेवा की।
आधा सैकड़ा से अधिक कालजयी कृतियों के रचयिता, पाथेय साहित्य- कला अकादमी के संस्थापक डा. सुमित्र के न रहने की सूचना मिलते ही संस्कारधानी सहित देश भर के साहित्य-जगत में शोक की लहर दौड़ गई। छह दशक तक हिंदी साहित्य कीसेवा में प्राणपण से सचेष्ट रहे डा. सुमित्र ने पिछले दिनों शब्द संसार स्तंभ में उनके व्यक्तित्व-कृतित्व को बांच सको तो बांच लो, आंखों का अखबार, प्रथम पृष्ठ से अंत तक, लिखा प्यार ही प्यार, शीर्षक से प्रकाशित किया था। उनका अंदाज-ए- बयां कुछ ऐसा था-मेरा नाम सुमित्र है, तबीयत राजकुमार, पीड़ा को जागीर है, बांट रहा हूं प्यार बांच सको तो बांच लो, आंखों का अखवार, प्रथम पृष्ठ से अंत तक, लिखा प्यार ही प्यार.. प्रेम सदा रहता युवा, पड़े न आयु प्रभाव, अंत रहता है सजल, चले रेत पर पाव.. परमेश्वर की ज्योति के आकृति जो अनुरूप, सहज भाव से सभी ने कहा उसे ही रूप प्यारी राधा नींद हैं, राधावल्लभ नैन, मोहक मुरली श्याम की, बकि राधा बैन।







