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एसई सिटी बनाम डीई विवाद और चरमराई बिजली व्यवस्था

पाँच डीई किसी तरह फील्ड पर सक्रिय रहकर व्यवस्था सँभाल रहे,एसई का रवैया – संवाद की बजाय दबाव

जबलपुर यश भारत शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था इन दिनों अधीक्षण अभियंता (सिटी) संजय अरोरा की कार्यशैली के कारण सवालों के घेरे में है। आरोप है कि अरोरा अपने ही अधीनस्थ अधिकारियों से सकारात्मक तालमेल बनाने में विफल हो रहे हैं। परिणामस्वरूप, शहर की बिजली व्यवस्था पर असर पड़ रहा है और जनता परेशान हो रही है।

अधीनस्थों से टकराव बढ़ा

शहर सर्किल में इस समय पाँच कार्यपालन अभियंता (डीई) तैनात हैं। ये अधिकारी उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और विजय नगर संभागों में कार्यरत हैं और लगातार फील्ड पर सक्रिय रहकर किसी तरह बिजली आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।लेकिन सूत्रों के अनुसार, एसई अरोरा बात-बात पर अधीनस्थों को फटकार लगाते हैं, प्रताड़ित करते हैं और दबाव बनाते हैं। यही वजह है कि अधीनस्थ अधिकारी भीतर ही भीतर नाराज़ हैं।

टीमवर्क टूटा, फील्ड पर असर

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी एसई की सफलता अधीनस्थों के साथ बेहतर तालमेल पर निर्भर करती है। लेकिन जब अरोरा की कार्यशैली में संवाद की बजाय दबाव हावी हो गया, तो टीमवर्क कमजोर हो गया।
👉 नतीजा यह है कि फील्ड वर्क प्रभावित हो रहा है और बिजली आपूर्ति की निगरानी कमजोर पड़ गई है।

फील्ड से दूरी, शिकायतें अनसुनी

स्थानीय उपभोक्ताओं और अधिकारियों दोनों की ही यह शिकायत है कि एसई सिटी फील्ड पर नदारद रहते हैं।न तो वे समय पर निरीक्षण करते हैं।न ही मौके पर पहुँचकर समस्याएँ समझते हैं।यहाँ तक कि फोन कॉल तक नहीं उठाते।
इस वजह से उपभोक्ताओं की शिकायतें लंबित रह जाती हैं और समाधान में काफी देरी होती है।

कटनी में भी विवादों से घिरे रहे
सूत्रों का कहना है कि जबलपुर में पदस्थ होने से पहले अरोरा का कार्यकाल कटनी में भी विवादों से भरा रहा। वहाँ भी अधीनस्थों के साथ टकराव, कामकाज में मनमानी और नेताओं की पैरवी से मनचाही पोस्टिंग हासिल करने की चर्चाएँ आम थीं। अब वही सिलसिला जबलपुर में भी दोहराया जा रहा है।

अफसर नाराज़ पर चुप
सूत्र बताते हैं कि अधीनस्थ अधिकारी भीतर ही भीतर बेहद नाराज़ हैं, लेकिन कोई भी औपचारिक शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।कारण साफ है – एसई के हौसले बुलंद हैं और विरोध करने पर अधीनस्थों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही खामोशी अरोरा की कार्यशैली को और ताकत दे रही है।

जनता पर सीधा असर

अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी और एसई की फील्ड से दूरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है।बिजली सप्लाई में गड़बड़ी अब रोज़ की समस्या है।समय पर निरीक्षण न होने से मरम्मत कार्य में देरी होती है।शिकायतों का निराकरण दिनों तक टल जाता है।नतीजा यह है कि शहरवासी लगातार बिजली कटौती और सप्लाई की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

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