SDM कोर्ट में प्रशासनिक हीलाहवाली : फैसले से ठीक पहले 3 फाइलें गायब, अब जांच रिपोर्ट भी लापता

सागर यशभारत l शासकीय दफ्तरों और अदालतों में आम जनता न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचती है, लेकिन जिला मुख्यालय स्थित एसडीएम कोर्ट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां जमीनी विवाद से जुड़ी 3 महत्वपूर्ण फाइलों को आदेश जारी होने से ठीक पहले रहस्यमयी तरीके से गायब कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब मामले की जांच के लिए बनाई गई फाइल भी प्रशासनिक अमले ने गुमा दी। पीड़ित आवेदक पिछले 4 साल से न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है।
फैसले के दिन ही गायब हुईं फाइलें
मामला बामनखेड़ी, उदयपुरा और कनेरादेव क्षेत्र के राजस्व प्रकरणों (जमीनी विवाद की 3 अपीलों) से जुड़ा है। इन मामलों में सुनवाई पूरी होने के बाद 14 नवंबर 2022 को एसडीएम कोर्ट द्वारा अंतिम आदेश जारी किया जाना था। लेकिन फैसला सुनाने की जगह कोर्ट से पूरी फाइलें ही गायब कर दी गईं।
फाइलें न मिलने पर जब तत्कालीन रीडर कमलेश अहिरवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, तो उन्होंने लिखित जवाब में बड़ा खुलासा किया। रीडर के अनुसार, आदेश टाइप होने के बाद तीनों फाइलें तत्कालीन एसडीएम सपना त्रिपाठी के केबिन में रखी गई थीं। इसी दौरान रीडर का स्थानांतरण हो गया। उन्होंने दावा किया कि केबिन से फाइलें वापस मांगी गईं, लेकिन उन्हें आज तक फाइलें नहीं सौंपी गईं।
जांच फाइल भी दबा दी गई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ितों ने अपर कलेक्टर से शिकायत की थी, जिसके बाद अपर कलेक्टर के आदेश पर फाइलों की तलाश के लिए जांच शुरू कराई गई। हालांकि, हद तो तब हो गई जब एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों ने इस जांच से संबंधित फाइल को ही गायब कर दिया। आवेदकों का सीधा आरोप है कि विपक्षी पार्टी को फायदा पहुंचाने और न्याय रोकने के लिए साठगांठ के तहत यह फाइलें दबाई गई हैं।
इन्होंने कहा…
“तीनों प्रकरणों की फाइलें ढूंढने के लिए एडीएम के आदेश पर जो जांच चल रही थी, वह जांच की फाइल भी एसडीएम ऑफिस के कर्मचारियों ने गुमा दी है। अब जांच की फाइल तलाशने के लिए एडीएम कोर्ट में अपील दायर करेंगे।”
— श्रीकांत खत्री, अधिवक्ता व आवेदक
“मेरे पास जानकारी आई थी कि एसडीएम कोर्ट से फाइल गुम हो गई है। अधिवक्ता ने कलेक्ट्रेट में आवेदन दिया था। मैंने एसडीएम को फाइल ढूंढने के लिए पत्र लिखा है।”
— अविनाश रावत,
अपर कलेक्टर, सागर






