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रेप आरोपी ने फरलो मिलते ही नाबालिग से की दरिंदगी, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

अहमदाबाद की सीबीआई कोर्ट ने एक शिक्षक को दूसरी बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। शिक्षक दो नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में पहले ही उम्रकैद की सजा काट रहा था, लेकिन फरलो पर बाहर आने के बाद उसने एक छात्रा को शादी का झांसा दिया और भगाकर ले गया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म कर उसे प्रेग्नेंट कर दिया। आरोपी का नाम धवल त्रिवेदी है।

रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा उसने धोखे को हथियार बनाया और झूठ का जाल बुनकर मासूम के साथ प्यार का नाटक किया। उसने शिक्षक और छात्र के रिश्ते को कलंकित करने का काम किया। जज ने कहा कि उसने प्यार का दिखावा किया और अपना असली चेहरा छिपा लिया। उसने इस अपराध को ठीक वैसे ही अंजाम दिया है, जैसे एक शिकारी शिकार को फंसाता है।

2014 में किया था ये कांड

कोर्ट ने 52 वर्षीय आरोपी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश दिया कि इस फैसले उसके जेल रिकाॅर्ड में दर्ज किया जाए। ताकि भविष्य में वह फरलो और पैरोल की मांग करे तो इसका ध्यान रखा जाए कि इस दौरान उसने समाज को कलंकित करने का काम किया है। बता दें कि आरोपी टीचर को 2014 में राजकोट जिले के पडाधरी से दो छात्राओं को भगाने और बलात्कार के आरोप में अरेस्ट किया गया था। मार्च 2018 में उसे दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। तब से वह जेल में था।

जेल से बाहर आया तो अंग्रेजी की कक्षाएं लगाई

फरलो मिलने के बाद वह वापस राजकोट सेंट्रल जेल नहीं लौटा। उसने अपना नाम धर्मेंद्र दवे रख लिया और चोटिला में अंग्रेजी बोलने की क्लासेज लगाना शुरू कर दिया। 2018 में उसने एक छात्रा को अपने प्यार के जाल में फंसाया और नेपाल ले गया। अलग-अलग जगहों पर उसने खुद को सुरजीत और मुख्तार जैसे नाम से खुद का परिचय करायाा। इस दौरान उसने छात्रा से शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए और उसे गर्भवती कर दिया। पीड़िता ने झारखंड के जमशेदपुर में एक बच्चे को जन्म दिया। मामले में सीबीआई गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर पीड़िता के लापता होने की जांच कर रही थी।

पीड़िता ने बताई आपबीती

इसके बाद जून 2020 में पीड़िता घर लौटी और सारी बात परिजनों को बताई। सीबीआई ने आरोपी टीचर को हिमाचल प्रदेश के बद्दी से अरेस्ट कर लिया। उस पर दुष्कर्म, अपहरण और फर्जीवाड़े का मुकदमा चलाया गया। मामले में पीड़िता की ओर आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे बरी किए बिना जीवन भर जेल में रहने का आदेश दिया।

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