रांझी का सिविल अस्पताल- पर्ची काटने वाले ने कहा मरीज की जान बचाना है तो देर न करो, यहां डॉक्टर-नर्स नहीं रहते
रात में परेशान होते है अस्पताल पहुंचने वाले लोग, घर में आराम करते हैं डॉक्टर-नर्स

जबलपुर, यशभारत। मरीजों को उचित इलाज मिले और उन्हें भटकना न पड़े इसके लिए रांझी में सिविल अस्पताल की स्थापना सरकार ने कराई जिसे छोटी विक्टोरिया भी कहा जाता है। लेकिन जानकर हैरानी होगी कि यहां पर लोगों को इलाज के नाम पर डरा धमकाकर कहा जाता है कि यहां मरीज भर्ती करने की वजाए दूसरे अस्पताल ले जाओ। ताजा मामला नर्सिंग नगर सत्य टॉवर के पास रहने वाली महिला मरीज सपना सिंह ठाकुर से जुड़ा है। दरअसल ४० साल की सपना ठाकुर को नाक से खून निकलने पर परिजन उसे रात ११ बजे सिविल अस्पताल रांझी लेकर पहुंचे लेकिन वहां पर्ची बनाने वाले व्यक्ति ने यह कहकर भगा दिया कि अस्पताल में कोई डॉक्टर-नर्स नहीं है अगर मरीज की जान बचाना है तो कहीं और लेकर जाओ। यह सुनकर मरीज के परिजन परेशान हुए और तत्काल मरीज को लेकर पहले विक्टोयिा अस्पताल ले गए इसके बाद सुबह मरीज का प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया।

सीएम हेल्प लाइन में शिकायत
सिविल अस्पताल में बदइंतजामी पाए जाने के बाद मरीज सपना सिंह के परिजनों मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की। परिजनों का कहना था कि अस्पताल की सुविधाएं क्षेत्रवासियों को देररात तक नही मिलती है। इलाज के अभाव में कई बार मरीज की मौत हो जाती है। सीएम हेल्पलाइन शिकायत करने के बाद उसे वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

डॉक्टरों की कमी पर जो नियुक्त है वो कर रहे लापरवाही
मालूम हो कि सिविल अस्पताल रांझी में शुरुआती दौर से ही डाक्टरों की कमी बरकरार है। मरीजों के अनुपात तथा 24 घंटे अस्पताल के संचालन के लिए मेडिकल आफीसरों की कमी बनी हुई है। वर्तमान में पांच दंत चिकित्सक समेत 13 डाक्टर कार्यरत हैं। स्वास्थ्य अमले का कहना है कि अस्पताल में एमबीबीएस डाक्टरों की आवश्यकता है। जिसके स्थान पर अन्य अस्पतालों से दंत चिकित्सकों को यहां अटैच कर दिया गया है। गत दिवस दंत चिकित्सक की लापरवाही के कारण हार्ट अटैक से पीडि़त एक मरीज की उपचार के अभाव में मौत हो गई थी। दंत चिकित्सकों से बतौर मेडिकल आफीसर सेवाएं ली जा रही हैं। अस्पताल में 17 नर्सिंग आफीसर की पदस्थापना की गई है। 40 बिस्तरीय वार्ड, ओपीडी, आपरेशन थिएटर में तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जा रही है।

वाटरमैन को बना दिया ड्रेसर-
अस्पताल में वार्डब्वाय, कंपाउंडर, ड्रेसर की कमी बनी हुई है। वाटरमैन से ड्रेसर का काम कराया जा रहा है। रोगी कल्याण समिति से एक वार्डब्वाय की पदस्थापना की गई है। परंतु इन पदों पर नियमित कर्मचारियों का अभाव है। इस व्यवस्था से कर्मचारी निराश हो रहे हैं। उनका कहना है कि जिस पद पर उनसे काम लिया जा रहा है, उस पद पर पदोन्नति नहीं दी जा रही।







