SCO समिट में आतंकवाद पर राजनाथ सिंह की खरी-खरी- निर्दोषों का खून बहाने वालों को छोड़ेंगे नहीं

चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में शंघाई देशों के रक्षामंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। कोई भी देश कितना भी शक्तिशाली हो वह अकेले सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज के समय में शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा है। इस दौरान उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र भी किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि निर्दोषों का खून बहाने वालों को छोड़ेंगे नहीं। हमने अफगानिस्तान में भी मानवीय सहायता की है। रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ देश सीमा पार आतंकवाद को नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह देते हैं। ऐसे दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने गिनाईं चुनौतियां
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि मेरा मानना ??है कि हमारे क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से जुड़ी हैं। इन समस्याओं का मूल कारण कट्टरपंथ, उग्रवाद और आतंकवाद में वृद्धि है। शांति और समृद्धि आतंकवाद और गैर-राज्य अभिनेताओं और आतंकवादी समूहों के हाथों में सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के साथ-साथ नहीं रह सकती। इन चुनौतियों से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है और हमें अपनी सामूहिक सुरक्षा के लिए इन बुराइयों के खिलाफ अपनी लड़ाई में एकजुट होना चाहिए।
अफगानिस्तान में विकास के लिए हम प्रतिबद्ध
एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के समर्थन में अपनी नीति पर लगातार अडिग रहा है। अफगानिस्तान के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास साझेदार के रूप में भारत अफगान लोगों के लिए क्षमता निर्माण पहलों को लागू करना जारी रखे हुए है। आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और अनुचित है, चाहे उसका उद्देश्य कुछ भी हो, जब भी, जहां भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। एससीओ सदस्यों को इस बुराई की स्पष्ट रूप से निंदा करनी चाहिए। सिंह ने कहा, हम सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के निंदनीय कृत्यों के अपराधियों, आर्थिक मदद और सपोर्ट करने वालों को जवाबदेह ठहराने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने पर जोर देते हैं।







