भोपाल

कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस मुख्यालय का आदेश  – गंभीर अपराध में तुरंत दर्ज होगी एफआईआर

कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस मुख्यालय का आदेश 
– गंभीर अपराध में तुरंत दर्ज होगी एफआईआर
– प्रारंभिक जांच की अवधि 14 दिन तय 
भोपाल, यशभारत। प्रदेश में अब गंभीर अपराधों की शिकायतों को लंबित रखना पुलिस अधिकारियों के लिए मुश्किल साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों और इकाइयों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि संज्ञेय अपराधों की सूचना मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। शिकायत मिलने के बाद लंबे समय तक जांच के नाम पर मामला टालने की प्रवृत्ति पर अब सख्ती बरती जाएगी। 
हाल ही में एक मामले में बिना एफआईआर दर्ज किए लंबे समय तक जांच करने पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की थी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में शिकायतों को महीनों तक लंबित रखने और निपटारे के नाम पर अवैध लेनदेन की शिकायतें भी सामने आ रही थीं, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
जारी निर्देशों में ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश मामला का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में यह तय करने के लिए प्रारंभिक जांच की जा सकती है कि मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है या नहीं। पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी प्रारंभिक जांच की अवधि अधिकतम 14 दिन होगी। इसके लिए थाने के अधिकारियों को डीएसपी स्तर के अधिकारी से अनुमति लेनी होगी और तय समय में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
इन मामलों में ही होगी प्रारंभिक जांच
निर्देशों के अनुसार भ्रष्टाचार, पारिवारिक या वैवाहिक विवाद, व्यावसायिक धोखाधड़ी तथा फर्जी जाति प्रमाण पत्र से लाभ लेने से जुड़े मामलों में ही प्रारंभिक जांच की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा अन्य गंभीर अपराधों में देरी करना नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।
इन मामलों में होगी सीधे एफआईआर
प्राप्त जानकारी के अनुसार जारी अदेश में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत हत्या, बलात्कार, अपहरण, डकैती, दहेज मृत्यु, मानव तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों जैसे अपराध संज्ञेय श्रेणी में आते हैं। इन मामलों में पुलिस बिना किसी पूर्व अनुमति के एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर सकती है और आवश्यक होने पर आरोपी को बिना वारंट गिरफ्तार भी किया जा सकता है। इसके विपरीत मानहानि, मारपीट की हल्की घटनाएं, अतिक्रमण या उपद्रव जैसे मामलों को असंज्ञेय अपराध माना जाता है। इनमें मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही जांच शुरू की जा सकती है।

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