जबलपुर मेडिकल सुपर स्पेशलिटी में ऑर्गन डोनेशनः10.13 में हार्ट और सुबह 10.44 में लीवर निकाला गया-ऑर्गन डोनर दिव्यांग बलीराम बहू की मौत से प्रेरित हुए, दो लोगों का बचाया जीवन

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पहली बार लीवर-हार्ट आर्गन डोनेशन की प्रक्रिया की गई। रोड एक्सीडेंट में घायल हुए सागर निवासी दिव्यांग बलीराम पटेल ने देह त्यागने के पहले दो लोगों को जीवनदान दिया। सुबह 10.13 में हार्ट और 10.44 में लीवर प्रत्यारोपित की प्रक्रिया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में की गई। मेडिकल से लेकर डुमना रोड तक ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया इसके लिए पुलिस और जिला प्रशासन की टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग टीम पूरे समय मुस्तैद थी। पहले ऑर्गन डोनेट में किडनी, हार्ट और लीवर को शामिल किया गया था लेकिन रात में मरीज को यूरन एसिड प्रॉबलम आने के कारण किडनी ऑर्गन डोनेट नहीं हो पाई। हार्ट को भोपाल एम्स भेजा गया जबकि लीवर को इंदौर अस्पताल जहां दो मरीजों को प्रत्यारोपित किया जाएगा।
21 जनवरी को सड़क हादसे में घायल हुआ दिव्यांग
मरीज के परिजन हरिनारायण पटेल ने बताया कि बड़े पापा बलीराम पटेल मूलतः सागर के रहने वालेे है परंतु कई सालों से सूरतलाई तिलवारा में रह रहे थे। 21 जनवरी को बड़े पापा अपनी व्हीलचेयर से जा रहे थे तभी पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी और वह घायल हो गए। इलाज के लिए रात में 1 बजे बड़े पापा को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उपचार के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि बड़े पापा का माइंड डेथ हो गया इसके बाद सभी ने निर्णय लिया कि बड़े पापा का ऑर्गन डोनेट किया जाए। इसके बाद किडनी, लीवर और हार्ट को डोनेट किया गया लेकिन कुछ कारणों से किडनी डोनेट नहीं हो पाई।

11 साल से जबलपुर में रहकर हनुमान मंदिर में पूजा
मरीज के परिजनों ने बताया कि बड़े पापा दिव्यांग है और करीब 11 साल से जबलपुर के सूरतलाई हनुमान मंदिर में पूजन-पाठ के साथ देख-रेख कर रहे थे। शुरूआत से ही दिव्यांग बलीराम पटेल का भगवान के प्रति अटूट आस्था थी और इसी वजह से वह जबलपुर आ गए और पूरे समय हनुमान जी की भक्ति करते थे।
बुधवार सुबह 8.30 बजे से डॉक्टरो की टीम जुटी
आर्गन डोनेट करने वाले मरीज और उनके परिजनों की जितनी प्रशंसा की जाए वो कम है।लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण काम मेडिकल डॉक्टरों का था। इस संबंध में सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर फर्णींन्द्र सोलंकी और डॉक्टर आशीष सेठी ने बताया कि बुधवार की सुबह 8.30 टीम जुटी हुई। इंदौर अस्पताल टीम ने लीवर और भोपाल एम्स की टीम ने हार्ट निकालने की प्रक्रिया को पूरा किया। मेडिकल अस्पताल की यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी टीम के साथ पूरे स्टाफ पूरा सहयोग किया। पहले तय किया गया था कि किडनी में डोनेट की जाएगी परंतु मरीज को यूरिन प्रॉबलम हुई थी ये नहीं हो पाया।
ग्रीन कॉरिडोर के लिए रातभर चली तैयारी
सीएमएचओ संजय मिश्रा ने बताया- ग्रीन कॉरीडोर के लिए रात भर तैयारियां की गई इसमें पुलिस और जिला प्रशासन का सहयोग रहा। श्री मिश्रा ने बताया कि सागर के मरीज बलिराम पटेल का मंगलवार को रोड एक्सीडेंट हो गया था। उन्हें मस्तिष्क में गंभीर चोटें आई थीं। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जबलपुर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रेफर किया गया। बुधवार को डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया। ऐसे में परिजनों ने अंगदान की इच्छा जाहिर की। इसके बाद यह पता लगाया गया कि अंगों की जरूरत कहां है। जानकारी मिली कि भोपाल एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट होना है। वहीं, चौइथराम हॉस्पिटल इंदौर में एक मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है। इस प्रक्रिया के लिए रातभर तैयारियां की गईं और ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

मरीज बलीराम की इनसाइड स्टोरी
बलीराम 4 भाई थे जिसमें दो भाईयों की मौत हो चुकी है जबकि एक छोटा भाई है वो भी दिव्यांग है। परिजनों ने बताया कि छोटे भाई की बहू मीनारानी की किडनी साल 2018 में खराब हो गई थी इसके लिए पूरे परिवार ने डॉक्टरों के यहां चक्कर काटे परंतु किसी ने भी मदद नहीं की। दिव्यांग बलीराम ने उसी वक्त सोच लिया था कि अगर किसी व्यक्ति की जान अंगदान से बचती है तो वह निश्चित रूप से अपने अंगदान करेगा। इसी का नतीजा ये है कि बहू की मौत के बाद बलीराम ने अपने परिवार वालों से कह दिया था कि वह उनकी मौत के पहले उनके शरीर का अंगदान कर दिया जाए।







