कोलार के पॉश फ्लैट में चल रहे ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़

कोलार के पॉश फ्लैट में चल रहे ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़
16 मोबाइल, 3 लैपटॉप और बड़ी संख्या में सिम कार्ड जब्त; सागर और जबलपुर के दो सट्टेबाज गिरफ्तार
भोपाल, यशभारत। राजधानी की कोलार रोड थाना पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आशियाना हाइट्स के एक फ्लैट में दबिश दी है। पुलिस ने यहां से हाईटेक तरीके से क्रिकेट मैचों पर दांव लगवा रहे दो सट्टेबाजों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से 16 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप और भारी मात्रा में सिम कार्ड बरामद हुए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 5 लाख रुपए आंकी गई है।
मुखबिर की सूचना पर एसीपी का सर्च वारंट
पुलिस के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि कोलार स्थित आशियाना हाइट्स के फ्लैट नंबर 104 में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना की तस्दीक होने पर एसीपी चूनाभट्टी से सर्च वारंट प्राप्त किया गया और पुलिस टीम ने अचानक दबिश दी। फ्लैट के अंदर का नजारा देखकर पुलिस भी दंग रह गई; वहां लैपटॉप और दर्जनों मोबाइलों के जरिए ऑनलाइन सट्टे का पूरा सेटअप जमाया गया था।
पूछताछ में आरोपियों की पहचान अमित सुहाने (निवासी सागर) और अमित रावत (निवासी जबलपुर) के रूप में हुई है। आरोपी क्रिकेट मैचों के दौरान हार-जीत पर ऑनलाइन दांव लगवाते थे। वे लोगों को महज कुछ घंटों में पैसा तीन गुना करने का लालच देकर सट्टे के दलदल में धकेलते थे। सट्टे की रकम का लेनदेन नकद के अलावा अलग-अलग डिजिटल बैंक खातों के माध्यम से किया जा रहा था।
किराए के फ्लैट को बनाया वार रूम
जांच में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपियों की मुलाकात ऑनलाइन सट्टेबाजी के दौरान ही हुई थी। जल्द अमीर बनने और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने की चाहत में दोनों ने हाथ मिला लिया। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने कोलार के एक पॉश इलाके में किराए पर फ्लैट लिया ताकि किसी को शक न हो और वहीं से अपना अवैध कारोबार संचालित करने लगे।
पुलिस अब खंगाल रही है कॉल डिटेल्स और बैंक खाते
कोलार पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब जब्त किए गए 16 मोबाइलों की कॉल डिटेल्स और लैपटॉप में मौजूद डेटा को खंगाल रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य गुर्गों और सट्टा लगाने वाले मुख्य ग्राहकों का पता लगाया जा सके। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में सिम कार्ड आरोपियों को किस आधार पर और किसने उपलब्ध कराए थे।







