ई-अटेंडेंस पर हाईकोर्ट में नया मोड़: शिक्षकों ने पुरानी याचिका वापस ली, अब नई पिटिशन होंगी पेश
डेटा लीक, साइबर फ्रॉड और DPI की चेतावनी

ई-अटेंडेंस पर हाईकोर्ट में नया मोड़: शिक्षकों ने पुरानी याचिका वापस ली, अब नई पिटिशन होंगी पेश
जबलपुर, यश भारत सरकारी स्कूलों में ‘हमारे शिक्षक’ ई-अटेंडेंस ऐप की अनिवार्यता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई बुधवार को अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गई। 27 शिक्षकों की ओर से दायर बहुचर्चित याचिका हाईकोर्ट में वापस ले ली गई। जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने कहा कि नई पिटिशन सुव्यवस्थित, स्पष्ट और सभी बिंदुओं को क्रमबद्ध तरीके से रखकर पेश की जाए, ताकि नियमों की सही जांच और सुनवाई संभव हो सके।
नई और मजबूत पिटिशन गुरुवार को होगी दाखिल
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वे ताजा तथ्यों, नए सबूतों और हालिया घटनाक्रम के आधार पर गुरुवार को नई याचिका दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि ई-अटेंडेंस ऐप न केवल तकनीकी रूप से अस्थिर है, बल्कि एक निजी संस्था द्वारा संचालित होने के कारण साइबर सुरक्षा पर गंभीर खतरे पैदा करता है।
डेटा लीक, साइबर फ्रॉड और DPI की चेतावनी
शिक्षकों की ओर से वकील अंशुमान सिंह ने कोर्ट को अवगत कराया कि ऐप शिक्षकों का व्यक्तिगत डेटा संग्रह करता है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम बेहद कमजोर हैं। कई शिक्षकों के बैंक खातों से रकम गायब होने और डेटा लीक होने की घटनाओं को आधार बनाते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इन मामलों की शिकायतें की थीं।
लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने भी माना कि कुछ साइबर फ्रॉड की घटनाएं वास्तविक हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए थे।
सरकार का पक्ष ऐप सुरक्षित, नेटवर्क में कोई दिक्कत नहीं
सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी मान्य साबित हुआ है और ऐप को डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त है। सरकार का दावा है कि सर्वर या नेटवर्क में कोई बड़ी समस्या नहीं है और अधिकांश शिक्षक बिना परेशानी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।इसके विपरीत, शिक्षक रोजाना आने वाली नेटवर्क एरर, सर्वर डाउन और तकनीकी दिक्कतों को मुख्य बाधा बताते हैं।
अब नई याचिका पर टिकी हैं नजरें
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पुराने आधारों पर कई निर्णय पहले ही दिए जा चुके हैं, इसलिए अगला फैसला नई पिटिशन के आधार पर ही होगा। गुरुवार को दाखिल होने वाली नई याचिका से इस पूरे विवाद में एक नया कानूनी मोड़ आने की संभावना है।







