New fertiliser schemesउर्वरक सब्सिडी के बोझ को एक लाख करोड़ रुपये तक कम करने में मदद मिल सकती जाने पूरी डिटेल्स

New fertiliser schemes उर्वरक सब्सिडी के बोझ को एक लाख करोड़ रुपये तक कम करने में मदद मिल सकती जाने पूरी डिटेल्सआपको जानकारी के लिए यह बता देते है की किसानो को मिलेगी राहत ऐसा बताया जा रहा है की एक अधिकारी ने ऐसा कहा है, की केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अभी इस सप्ताह में उर्वरक सब्सिडी के बोझ कम करने में वाली योजनाओं को मंजूरी दे सकता है। जी हां जो की आपको अगले तीन वर्षों में सरकार के खाद की सब्सिडी को कम करने में सहायता मिलेगी।और इन सरकारी अधिकारी ने ऐसा भी कहा है की यह योजनाएं पीएम प्रणाम, एक उदार बाजार विकास सहायता, यूरिया गोल्ड योजना है।
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New fertiliser schemesउर्वरक सब्सिडी के बोझ को एक लाख करोड़ रुपये तक कम करने में मदद मिल सकती जाने पूरी डिटेल्स
आपको जानकारी के मुताबित यह बता देते है की इसमें आपको पीएम प्रणाम में राज्य सरकारों को रासायनिक खादों की खपत को कम करने के लिए और इसके अलावा जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।और इसमें आपको बता देते है की एमडीए योजना कंपोस्टिंग को बढ़ावा भी देती है।
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उर्वरक सब्सिडी के बोझ को एक लाख करोड़ रुपये तक कम करने में “पीएम प्रणाम और बाजार विकास सहायता योजनाओं के कारण सरकार पर इसकी सब्सिडी का बोझ भी कम होगा।कुछ इसमें अधिकारी ने ऐसा भी कहा है की इन योजनाओं के लागू होने के बाद भी वित्त वर्ष 25, वित्त वर्ष 26 में सभी किसानो को खाद सब्सिडी में लगभग से 1 लाख करोड़ रुपये तक कम करने में सहायता भी मिलेगी।और FY24 के लिए बजट में खाद की सब्सिडी करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये तक के होगी।
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कुछ अधिकारी का ऐसा भी कहना है की अगर राज्य पिछले तीन वर्षों की बात की जाये तो उसमे औसत की तुलना यह रासायनिक खादों की खपत को कम कर देते है।आगे इसे बचाया जाये तो सब्सिडी का 50 प्रतिशत उन्हें स्थानांतरित कर दिया जाएगा।अधिकारी ने तो ऐसा भी कहा कि अगर तरल नैनो यूरिया के उपयोग के साथ में पीएम प्रणाम से केंद्र को तीन साल में 19,000 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना बताई जा रही है।इस तरल नैनो यूरिया, एक नाइट्रोजन उर्वरक जिसे सस्ता और अधिक कुशल कहा जाता है,यह तो इस दानेदार यूरिया के आयात को कम करने की क्षमता रखता है।
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आपको जानकारी के लिए यह बता देते है की अगर उदारीकृत एमडीए योजना के तहत, जो शहरों में कंपोस्टिंग को बढ़ावा दिया जा रह है वहा पर वित्त वर्ष 24 और उसके साथ में तीन वर्षों में कुल परिव्यय 1,451 करोड़ रुपये है।और इसमें आपको बताते है की इन खाद निर्माताओं को भी 1,500 रुपये प्रति टन की मदद भी दी जाएगी। और यह योजना में वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देगी, यह योजना के अंतर्गत में ग्रामीण क्षेत्रों में यह बायोगैस और हरी खाद, कंपोस्टिंग सहित अन्य जैविक कचरे तक को शामिल किया जाता है।
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