आईसीएआर की नीतियों के खिलाफ देशभर में केवीके कर्मचारियों का प्रदर्शन
जबलपुर कृषि विज्ञान केंद्र में भी किया गया प्रदर्शन

यश भारत, नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ आज देशभर में कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने कलम बंद हड़ताल कर नारेबाजी की और “वन नेशन, वन केवीके” नीति लागू करने की मांग दोहराई।
प्रदर्शन का आह्वान फोरम ऑफ केवीके एंड एआईसीआरपी ने किया था। कर्मचारियों का कहना है कि ICAR के अधीन कार्यरत केवीके और गैर-ICAR केवीके कर्मचारियों के बीच भारी भेदभाव किया जा रहा है। समान कार्य करने के बावजूद वेतन, पदोन्नति और सेवा शर्तों में अंतर बना हुआ है। कई राज्यों में कर्मचारियों को 6 से 9 महीने तक वेतन नहीं मिलता, जबकि पेंशन, ग्रेच्युटी और समान सेवानिवृत्ति आयु जैसे लाभ भी उनसे वंचित हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ICAR न केवल अपने कर्मचारियों को तरजीह देता है, बल्कि गैर-ICAR केवीके पर नकारात्मक और विरोधाभासी आदेश जारी कर कार्य वातावरण को प्रभावित करता है। इसी असमानता के खिलाफ देशभर में हजारों कर्मचारी अपने-अपने केंद्रों पर तख्तियां और बैनर लेकर विरोध में उतरे।

केवीके की स्थापना वर्ष 1974 में हुई थी और यह पिछले 50 वर्षों से किसानों तक वैज्ञानिक शोध और नई तकनीक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। फिलहाल केवल 9% केवीके सीधे ICAR के नियंत्रण में हैं जबकि 91% राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, एनजीओ और अन्य संस्थानों द्वारा संचालित हैं।
फोरम ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को लेकर ICAR और केंद्र सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आगामी VKSA (रबी) अभियान का बहिष्कार किया जाएगा और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों ने साफ कहा कि अब केवल औपचारिक लिखित आदेश ही स्वीकार किए जाएंगे, मौखिक आश्वासन नहीं।







